राजकरण

अंधियारा छंटा है, सूरज निकला है, कमल खिला है

भाजपा के स्थापना दिवस पर खास

अंधियारा छंटेगा। सूरज निकलेगा। कमल खिलेगा। इन पंक्तियों ने इतिहास रच दिया। सभागार तालियों से गूंजता रहा। अटल बिहारी वाजपेयी की ये पंक्तियां अमर हो गईं। सार्थक भी हुईं। सत्य भी सिद्ध हुईं। अटल जी ने भविष्य पढ़ लिया था। अवसर था भाजपा की स्थापना का। उनका सपना आज साकार रूप में हमारे सामने है। आज एक दर्जन से अधिक राज्यों में भाजपा की सरकार है। यह संभव हुआ है कार्यकर्ताओं की तपस्या, संकल्प, साधना और संघर्ष से। दशकों तक सत्ता में आने का संघर्ष चला। भाजपा का लक्ष्य केवल सत्ताप्राप्त करना नहीं था। इस लक्ष्य के पीछे अनेक संकल्प और महान उद्देश्य निहित थे। राम मंदिर निर्माण का स्वप्न था।

अनुच्छेद 370 को हटाने का संकल्प था। आज न केवल भाजपा सत्ता में है, बल्कि इन संकल्पों को पूर्ण भी कर चुकी है। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में घोषणा कीहै कि देश नक्सली आतंक से मुक्तहो चुका है। यह उपलब्धि आसान नहीं थी। वहीं कश्मीर की वादियों में आज विकास की नई बयार बह रही है। आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार हुआ है। पत्थरबाज़ी जैसी घटनाएं अब अतीत बन चुकी हैं। भाजपा की इस ऐतिहासिक यात्रा को समझने के लिए उन महान व्यक्तित्वों को स्मरण करना आवश्यक है, जिन्होंने इस विचारधारा को जन्म दिया, उसे पोषित किया और जन-जन तक पहुंचाया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रवाद की ज्योति प्रज्वलित की। वही आगे चलकर एक विशाल आंदोलन का आधार बनी। उनका बलिदान केवल एक व्यक्ति का त्याग नहीं था, बल्कि भारत की एकता और अखंडता के लिए दिया गया अमर संदेश था।

पं. दीनदयाल उपाध्याय ने “एकात्म मानववाद” का दर्शन देकर राजनीति को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। उन्होंने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की जो बात कही, वही आज “अंत्योदय” के रूप में सरकार की नीतियों में दिखाई देती है। लालकृष्ण आडवाणी ने संगठन को गति और विस्तार दिया। उनकी रथ यात्राओं ने न केवल राजनीतिक चेतना जगाई, बल्कि भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त विकल्प के रूप में स्थापित किया। और फिर आया वह दौर, जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने नई ऊंचाइयों को छुआ। मोदी जी ने “संकल्प से सिद्धि” के मंत्र को वास्तविकता में परिवर्तित किया। उनके नेतृत्व में देश ने निर्णायक और ऐतिहासिक फैसले देखे। चाहे वह राम मंदिर निर्माण हो। अनुच्छेद 370 का हटना हो, या फिर वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा। मोदी युग ने यह सिद्ध किया कि जब नेतृत्व दृढ़ हो, नीयत स्पष्ट हो और उद्देश्य राष्ट्रहित हो, तो असंभव भी संभव बन जाता है।

भाजपा की यह यात्रा केवल राजनीतिक विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक विचार, एक विश्वास और एक राष्ट्र के पुनर्जागरण की गाथा है। इसमें अनगिनत कार्यकर्ताओं का परिश्रम, त्याग और समर्पण शामिल है, जिन्होंने बिना किसी अपेक्षा के इस आंदोलन को मजबूत किया। आज जब हम इस यात्रा को देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि अटल जी के शब्द केवल एक भाषण नहीं थे, वे एक युगदृष्टा की भविष्यवाणी थे। आज का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है।

यह केवल एक संगठन की स्थापना का दिन नहीं, बल्कि एक विचार, एक संकल्प और एक राष्ट्रवादी आंदोलन के उदय का दिन है। वर्षों पहले बोया गया यह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी जड़ें देश के कोने-कोने में फैली हुई हैं। अंधियारा छंटा है, सूरज निकला है और कमल खिल चुका है। खिल रहा है। लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि एक नए भारत के निर्माण की शुरुआत है।