चुनाव आयोग
ने पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को
स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और निष्पक्ष
तरीके से संपन्न कराने के लिए कड़े
निर्देश जारी किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त
(सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव
आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक
जोशी के साथ मिलकर मुख्य सचिव,
पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस
आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों
को इस संबंध में निर्देशित किया है।
यह निर्देश मंडल आयुक्तों, एडीजीपी,
आईजी, जिलाधिकारियों, पुलिस
आयुक्तों, एसएसपी और एसपी सहित
सभी स्तर के अधिकारियों पर लागू होंगे।
चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया
है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से भय,
हिंसा, धमकी, प्रलोभन, बूथ कैप्चरिंग,
बूथ जैमिंग और मतदान में किसी भी
प्रकार की बाधा से मुक्त होनी चाहिए।
यह निर्देश मालदा जिले में हाल ही में हुई
एक दुर्भाग्यपूर्णघटना के बाद आए हैं,
जहां एक अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण
(एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता
सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर
नाम हटाए जाने के विरोध में ग्रामीणों
ने तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक
अधिकारियों को बंधक बना लिया था।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की
घोषणा के बाद से ही राजनीति गरमा
गई थी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस
प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करते हुए चुनाव
आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने
का आरोप लगाया था। वहीं, भाजपा ने
इसे घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई
के तौर पर पेश किया था। एनआईए से
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट
में प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले
की अगली सुनवाई 6 अप्रैल, 2026 को
निर्धारितहै, जिसमें संबंधित अधिकारियों
को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश
दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना
को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक
बेशर्म और जानबूझकर किया गया प्रयास
बताया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की
अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बात पर चिंता
व्यक्त की थी कि पूर्व सूचना के बावजूद
राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा प्रदान
करने में विफल रहे, जिससे अधिकारी
घंटों तक बिना भोजन या पानी के रहे।
अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और
पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ राज्य
अधिकारियों को उनके निष्क्रियता के
लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।