लोकतंत्र की मजबूती
और निष्पक्ष शासन के लिए सांविधानिक
संस्थाओं की स्वतंत्रता को बेहद जरूरी
बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी
वी नागरत्ना ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने
कहा कि चुनाव आयोग और नियंत्रक
एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी
संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से पूरी
तरह मुक्त रहना चाहिए। इससे लोकतंत्र
की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहती
है।
पटना में आयोजित एक कार्यक्रम
के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि
संविधान ने जानबूझकर ऐसी संस्थाओं
का निर्माण किया है, जो शासन के अहम
क्षेत्रों की निगरानी करें।
उन्होंने कहा कि
अगर इन संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव
बढ़ेगा, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो
सकतीहैं और सत्ता संतुलन बिगड़ सकता
है।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि चुनाव
सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह
लोकतंत्र की नींव है। भारतीय चुनाव
आयोग की स्वतंत्रता जरूरी है, क्योंकि
यही संस्था चुनावों को निष्पक्ष तरीके से
कराती है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव
प्रक्रिया प्रभावित हुई, तो पूरे लोकतंत्र की
विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा
परीक्षक की भूमिका को भी अहम बताया।
उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च का ऑडिट
जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके
कि जनता का पैसा सही तरीके से खर्चहो
रहा है।
अगर यह निगरानी कमजोर हुई,
तो वित्तीय पारदर्शिता खत्म हो सकती है।
जस्टिस नागरत्ना ने वित्त आयोग का
जिक्र करते हुए कहा कि यह संस्था राज्यों
और केंद्र के बीच वित्तीय संतुलन बनाए
रखने में मदद करती है। इससे राजनीतिक
प्रभाव के बजाय निष्पक्ष तरीके से
संसाधनों का वितरण होता है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में कई
नियामक संस्थाएं जैसे भारतीय प्रतिस्पर्धा
आयोग, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय
बोर्ड और भारतीय दूरसंचार नियामक
प्राधिकरण भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
ये संस्थाएं जटिल आर्थिक और तकनीकी
क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखती हैं।
जस्टिस नागरत्ना ने चेतावनी दी कि
अगर सांविधानिक संस्थाएं एक-दूसरे
पर निगरानी रखना बंद कर देंगी, तो
लोकतत्रं कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा
कि इतिहास बताता है कि जब संस्थाएं
कमजोर होती हैं, तो संविधान की संरचना
भीटूटने लगतीहै। ऐसे में इन संस्थाओं की
स्वतंत्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है।