उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। यूपी एटीएस की गिरफ्त में आए आईएसआई से जुड़े चार संदिग्ध लखनऊ, मेरठ समेत कई शहरों में गाड़ियों के शोरूम, गैस सिलेंडर से भरे ट्रक और रेलवे ट्रैक के किनारे लगे सिग्नल बॉक्स को निशाना बनाने की तैयारी में थे। उनका मकसद आगजनी और अफरा-तफरी फैलाना था।
जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठा आईएसआई हैंडलर, पकड़े गए साकिब उर्फ डेविल के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी करा रहा था। फोटो और वीडियो भेजने के लिए उसके नेटवर्क में लोकेश पंडित उर्फ पपला और विकास गहलावत उर्फ रौनक जैसे लोग भी जुड़े थे। पैसों के लालच में भेजी गई यही जानकारी बड़े हमले की बुनियाद बन रही थी।
पिछले 5 वर्षों में उत्तर प्रदेश में डेढ़ दर्जन से अधिक ऐसे नेटवर्क पकड़े जा चुके हैं। इसका मतलब है कि दुश्मन की नजर लगातार यूपी के सैन्य इलाकों, अहम प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों पर बनी हुई है।
शुक्रवार को यूपी एटीएस ने मेरठ और नोएडा के रहने वाले साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, लोकेश पंडित उर्फ पपला और विकास गहलावत उर्फ रौनक को लखनऊ रेलवे स्टेशन से उस समय गिरफ्तार किया, जब वे स्टेशन के पास लगे रेलवे सिग्नल बॉक्स को उड़ाकर ट्रेन संचालन बाधित करने और दुर्घटना कराने की साजिश को अंजाम देने वाले थे। साकिब उर्फ डेविल इस पूरे मॉड्यूल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
पाकिस्तान में बैठे आईएसआई हैंडलर के इशारे पर साकिब अपने तीन साथियों के साथ मिलकर सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि गाजियाबाद, अलीगढ़, मेरठ और नोएडा में भी आगजनी और विस्फोट की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में था।
जांच में यह भी सामने आया कि 4 मार्च को बिजनौर में एक पिकअप वाहन में आग लगाने की घटना को भी इसी मॉड्यूल ने अंजाम दिया था। इसका वीडियो टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया था। हैंडलर गूगल लोकेशन की स्क्रीन रिकॉर्डिंग भेजकर कंटोनमेंट एरिया, आर्मी मूवमेंट और अहम प्रतिष्ठानों की जानकारी मांगता था। इसके बदले वह साकिब को क्यूआर कोड के जरिए पैसे भेज रहा था।
यूपी एटीएस को मोबाइल जांच में मेरठ, अलीगढ़ और गाजियाबाद के कई गाड़ियों के शोरूम के वीडियो भी मिले हैं, जिन्हें हमले से पहले हैंडलर को भेजा गया था। जांच में यह भी पता चला कि साकिब उर्फ डेविल ने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील पोस्ट की थी, जिसके बाद दुबई में बैठा आकिब उसके संपर्क में आया। आकिब ने उसे धीरे-धीरे गजवा-ए-हिंद, ओसामा बिन लादेन, कश्मीर मुजाहिदीन और फर्रुखतुल्ला गौरी जैसे नामों से जुड़े टेलीग्राम चैनलों से जोड़ दिया।
इन्हीं चैनलों के जरिए पाकिस्तान में बैठा आईएसआई हैंडलर साकिब के संपर्क में आया और उसके जरिए यह मॉड्यूल तैयार किया गया। साकिब ने सबसे पहले मेरठ के अपने दोस्त अरबाब को जोड़ा, फिर पैसों का लालच देकर नोएडा में मजदूरी करने वाले लोकेश पंडित और विकास गहलावत को भी इस नेटवर्क में शामिल किया। यूपी एटीएस अब इन चारों को पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर आगे की पूछताछ कर रही है और अन्य गिरफ्तारियों की संभावना भी जताई जा रही है।
बीते समय में भी उत्तर प्रदेश को दहलाने की कई साजिशें सामने आ चुकी हैं। 18 मार्च 2026 को यूपी एटीएस और हापुड़ पुलिस ने अजीम राणा और आजाद अली को गिरफ्तार किया, जो पाकिस्तान में बैठे आईएसआई हैंडलर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे और दिल्ली-एनसीआर के मंदिरों की रेकी कर रहे थे। 29 मार्च 2026 को मुरादाबाद के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे हारीश अली को गिरफ्तार किया गया, जो सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर नेटवर्क बना रहा था।
मार्च 2026 में ही नेवी के लांस नायक आदर्श कुमार उर्फ लकी को आईएसआई के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया। वह कोच्चि स्थित साउदर्न कमांड बेस पर तैनात था और संवेदनशील सूचनाएं साझा कर रहा था।
2025 में प्रयागराज महाकुंभ को निशाना बनाने की साजिश भी सामने आई थी, जिसमें बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ मिलकर विस्फोट और भगदड़ की योजना बनाई गई थी। इसी तरह नवंबर 2025 में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े डॉक्टर मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसने बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट इकट्ठा किया था।
अन्य मामलों में दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहरों के महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी, खतरनाक केमिकल से हमले की तैयारी, फंडिंग नेटवर्क और हनी ट्रैप के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल करने जैसी साजिशें भी उजागर हुई हैं।
जुलाई 2023 में अंडरवर्ल्ड से जुड़े शूटरों की गिरफ्तारी, 2021 में अलकायदा मॉड्यूल का खुलासा और 2017 में आईएसआईएस आतंकी सैफुल्लाह का एनकाउंटर—ये सभी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि प्रदेश लगातार आतंकी निशाने पर रहा है।
फिलहाल 2 अप्रैल 2026 को पकड़े गए इस मॉड्यूल के सभी संदिग्धों से यूपी एटीएस पूछताछ कर रही है। एटीएस प्रमुख और यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश के अनुसार, मुख्य आरोपी साकिब उर्फ डेविल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों के संपर्क में था और धर्म के नाम पर लोगों को भड़काकर आगजनी और विस्फोट की घटनाएं कराने की कोशिश कर रहा था।
संदिग्धों के पास से 7 स्मार्टफोन बरामद हुए हैं। इनका डेटा रिकवर कर पूरे नेटवर्क में शामिल ओवरग्राउंड वर्कर, शरण देने वाले और अन्य सहयोगियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।