48 घंटे में सीएनजी के दाम 3 रुपये बढ़े
देश में मई के मध्य में बढ़ती महंगाई ने आम नागरिकों की जेब पर बड़ा असर डाला है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी ने आयात लागत बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, दूध और सोने जैसी रोजमर्रा की जरूरतों पर दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे हैं कि सीएनजी की कीमतों में महज 48 घंटे के भीतर दो बार बढ़ोतरी की गई, जिससे परिवहन क्षेत्र और निजी वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। इसी बीच बढ़ते दबाव को देखते हुए Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने भी अपनी सेवाओं में विस्तार करने का फैसला लिया है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा सके।
17 मई: 15 मई को ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद 17 मई 2026 को Indraprastha Gas Limited (IGL) ने सीएनजी की कीमत फिर ₹1 प्रति किलो बढ़ा दी। अब दिल्ली में सीएनजी ₹80.09 प्रति किलो (पहले ₹77.09) हो गई है। नोएडा-गाजियाबाद में इसकी कीमत ₹88.70 और गुरुग्राम में ₹85.12 प्रति किलो पहुंच गई है। इस तरह 48 घंटे में कुल ₹3 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। IGL ने बढ़ती लागत, डॉलर की मजबूती और हार्मुज जलडमरूमध्य संकट को इसकी वजह बताया है। हालांकि सीएनजी अभी भी पेट्रोल-डीजल की तुलना में लगभग 45% सस्ती है, लेकिन ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, बस और निजी सीएनजी वाहन चालकों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
15 मई: तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। चार साल बाद हुई इस बढ़ोतरी के पीछे कंपनियों का तर्क है कि वे रोजाना ₹1000-1200 करोड़ के घाटे का सामना कर रही थीं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक उछाल और ईरान संकट के कारण कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ीं। इसका असर अब परिवहन, कृषि और लॉजिस्टिक्स लागत पर दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सब्जियां, फल और FMCG उत्पाद जल्द और महंगे हो सकते हैं। साथ ही ओला-ऊबर जैसी कैब सेवाएं और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं।
14 मई: सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 8.3% पर पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। ईंधन और पावर सेक्टर में महंगाई 24.71% तक पहुंच गई, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी लागत बढ़ने लगी है। खुदरा महंगाई (CPI) अप्रैल में 3.48% रही, लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति 4% के करीब पहुंचने से आने वाले महीनों में और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
13 मई: Amul (GCMMF) और Mother Dairy ने दूध के दाम ₹2 प्रति लीटर बढ़ा दिए। कंपनियों के अनुसार, पशुओं के चारे, पैकेजिंग, ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को दिए जाने वाले भुगतान में 3.7% से 6% तक की बढ़ोतरी के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ीं। इससे पहले अमूल ने मई 2025 में भी दूध के दाम बढ़ाए थे।
वहीं, सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने-चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। अप्रैल में सोने के आयात में 82% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इस फैसले के बाद सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है और शादी-ब्याह वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में महंगाई और तेज हो सकती है। ऐसे में Reserve Bank of India (RBI) के लिए ब्याज दरों और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।