होर्मुज की खाड़ी में पिछले 48 घंटों के अंदर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अचानक बढ़ गया. अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले, ईरानी टैंकर पर अमेरिकी गोलीबारी और फिर ईरान के बंदरगाह और द्वीपों पर अमेरिकी हमले - ये घटनाएं अब एक खतरनाक सिलसिले में बदल गई हैं. ईरान ने UAE के फुजैरा पोर्ट पर एक दर्जन से ज्यादा बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागीं. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया. इसके बाद सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिका को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत अचानक रोक दी. उधर, अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाह बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप और मिनाब पर हमले किए. ये हमले ईरान के फुजैरा हमले और अमेरिकी जहाजों पर हमले का जवाब थे. ईरान ने भी UAE के पास अमेरिकी जहाजों पर जवाबी हमले किए हैं. ईरान ने तीन अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाया. ईरानी सेना ने मिसाइल, ड्रोन और छोटी हमलावर नावों का इस्तेमाल किया. अमेरिकी जहाजों ने लेयर्ड डिफेंस का इस्तेमाल कर सभी हमलों को रोक लिया. कोई भी अमेरिकी जहाज क्षतिग्रस्त नहीं हुआ. इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला डा सिल्वा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ बातचीत की.इन बैठकों में व्यापार, टैरिफ और ईरान के परमाणु मुद्दे पर चर्चा हुई. वहीं, ट्रंप ने क्यूबा पर नए कड़े प्रतिबंध भी लगाए.
सऊदी-कुवैत ने अमेरिकी जेट्स के लिए एयरस्पेस पर बैन हटाया
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए चल रहे अमेरिकी मिशन को बड़ी कामयाबी मिली है. सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिकी सेना की उनके एयर स्पेस और सैन्य ठिकानों (एयरबेस) के इस्तेमाल पर लगी पाबंदियां हटा दी हैं. ट्रंप होर्मुज को लेकर लगातार खाड़ी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच, सऊदी अरब और कुवैत के इस कदम से ट्रंप प्रशासन की कोशिशों के बीच आ रही बाधाएं दूर होती दिख रही हैं. अब अमेरिका उन जहाजों को नौसैनिक और हवाई सुरक्षा देने के अभियान (ऑपरेशन फ्रीडम) को फिर से शुरू करने तैयारी कर रहा है. बता दें कि अमेरिकी मिशन को इस सप्ताह शुरू होने के 36 घंटों के भीतर ही रोकना पड़ा था. लेकिन अब पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि ये ऑपरेशन इसी सप्ताह फिर से शुरू किया जा सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए अमेरिका को एक बड़ा हवाई बेड़े की जरूरत है. ये बेड़ा व्यावसायिक जहाजों को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के खतरों से सुरक्षा देता है. इस मिशन की कामयाबी के लिए सऊदी अरब और कुवैत के सैन्य ठिकाने और उनके एयरस्पेस का इस्तेमाल करना अमेरिका के लिए बेहद अहम है.
'ऑपरेशन फ्रीडम' को लेकर पहले सऊदी और अमेरिका के बीच विवाद खड़ा हो गया था. खाड़ी देशों ने पहुंच सीमित किए जाने के कारण वाशिंगटन और रियाद के बीच सुरक्षा समझौतों पर खतरा मंडराने लगा था. हालात को संभालने के लिए ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच कई लेवल पर फोन कॉल हुए. इन वार्ताओं ने सैन्य विवाद को कम करने और एक बार फिर सहयोग करने में मदद की. अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली ग्लोबल शिपिंग के लिए पूर्ण नौसैनिक सुरक्षा बहाल करना है. ये रास्ता ग्लोबल ऑयल सप्लाई और व्यापार के लिए लाइफलाइन माना जाता है.