तमिलनाडु में भी चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। साउथ सुपरस्टार विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 107 सीटों पर जीत दर्ज की और पारंपरिक दलों डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) को कड़ी चुनौती दी। यह राज्य में एक नई राजनीतिक ताकत के उभरने का संकेत है। तमिलनाडु में फिल्मी सितारों को नेता चुनने का लंबा इतिहास रहा है और इसी क्रम में अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने द्रविड़ पार्टियों के दबदबे के बीच बड़ा बदलाव किया है। अपने पहले ही चुनाव में वह सूबे की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे हैं। हालांकि, उनकी पार्टी 107 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े 118 से अभी दूर है।
ऐसे में सरकार बनाने के लिए विजय को सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी। उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं। कांग्रेस पहले ही उन्हें समर्थन का प्रस्ताव दे चुकी है और उनके पिता ने भी संकेत दिया है कि TVK कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। हालांकि, विधानसभा चुनाव से पहले TVK ने AIADMK और DMK के साथ गठबंधन से साफ इनकार कर दिया था।
TVK ने अपने चुनाव प्रचार को पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से अलग एक नई शुरुआत के तौर पर पेश किया था। लेकिन बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे छोटी पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। इसके बावजूद विजय की यह लहर तमिलनाडु की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।
राज्य में एमजीआर (MGR) जैसे फिल्मी सितारों को नेता चुनने का इतिहास रहा है, लेकिन रजनीकांत और कमल हासन जैसे अभिनेता अपनी लोकप्रियता को वोटों में पूरी तरह बदलने में सफल नहीं हो पाए। विजय की रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी, खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। उन्हें दलितों और ईसाई वोटों का भी अच्छा समर्थन मिला, जो पहले DMK के पक्ष में जाता था।
इसके अलावा, वेल्लालर समुदाय से आने वाले विजय को सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इन्कम्बेंसी) का भी फायदा मिला। अगर इस चुनाव में TVK मैदान में नहीं होती, तो इसका फायदा AIADMK को मिल सकता था। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय उन्हीं द्रविड़ पार्टियों के साथ गठबंधन करेंगे, जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा, या कोई नया विकल्प चुनेंगे।
सरकार बनाने के लिए विजय के सामने चार प्रमुख विकल्प हैं। पहला, वे AIADMK के साथ गठबंधन कर सकते हैं। पहले भी AIADMK ने TVK से गठबंधन की कोशिश की थी, लेकिन सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री पद को लेकर बात नहीं बन पाई थी। अब बदले हालात में AIADMK गठबंधन के लिए तैयार दिख रही है।
दूसरा विकल्प, AIADMK से गठबंधन करते समय BJP से दूरी बनाने की शर्त रखी जा सकती है, क्योंकि विजय ने BJP को अपनी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी बताया है। हालांकि, यह शर्त AIADMK के लिए मुश्किल हो सकती है।
तीसरा विकल्प, विजय छोटे दलों जैसे PMK, DMDK, VCK और AMMK के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इन दलों के पास सीमित सीटें हैं, लेकिन मिलकर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया जा सकता है।
चौथा विकल्प, कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाना हो सकता है। कांग्रेस पहले ही समर्थन का संकेत दे चुकी है, जैसा उसने पिछली DMK सरकार में किया था।
वहीं, पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजों में एनडीए गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। एनडीए को 17 से अधिक सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस गठबंधन को 6 से ज्यादा और TVK को 2 सीटें मिली हैं। 30 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 16 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में एनडीए ने सत्ता बरकरार रखने की स्थिति मजबूत कर ली है।
शुरुआती रुझानों में भी भाजपा गठबंधन आगे था और अंतिम नतीजों में यह बढ़त बहुमत में बदल गई। पुडुचेरी में मुकाबला एनडीए, कांग्रेस-डीएमके गठबंधन और TVK के बीच त्रिकोणीय रहा, लेकिन अंततः जीत एनडीए के पक्ष में गई। यह परिणाम केंद्र शासित प्रदेश में गठबंधन की ताकत और स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता को दर्शाता है।