अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव कम नहीं हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर फिर हमले हो सकते हैं। परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर गतिरोध कायम है, जिससे बड़े संघर्ष की आशंका एक बार फिर बढ़ गई है।
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने ओमानी समकक्ष बदर अल-बुसैदी के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की। अराघची ने ईरान के उन कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी भी दी, जिनका उद्देश्य अमेरिका-इज़रायल तनाव को कम कर क्षेत्रीय शांति बहाल करना है।
हालांकि, कागज़ों पर सीजफायर होने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। बातचीत बार-बार तीन प्रमुख मुद्दों पर आकर अटक रही है, जिससे हालात में सुधार नहीं हो पा रहा।
दरअसल, दोनों देशों के बीच डील की राह में तीन बड़ी बाधाएं हैं— पहला, ईरान का परमाणु कार्यक्रम; दूसरा, होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित नाकाबंदी; और तीसरा, भविष्य में हमले न करने की गारंटी। अमेरिका इन मुद्दों पर अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है, जबकि ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम से समझौता करने के संकेत नहीं दे रहा है।