कर्नाटक के दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव की मतगणना शुरू होने से ठीक पहले एक गंभीर प्रशासनिक गड़बड़ी सामने आई, जिसने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। डीआरआर स्कूल स्थित काउंटिंग सेंटर पर जब चुनाव अधिकारियों और प्रत्याशियों के एजेंटों की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो पाया गया कि उपलब्ध चाबियां ताले से मेल नहीं खा रही थीं।
कई बार प्रयास करने के बावजूद ताले नहीं खुले, जिसके बाद अधिकारियों को मजबूरन ताले तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से काउंटिंग सेंटर पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मतगणना जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में इस तरह की चूक ने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, साथ ही पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं भी बढ़ा दीं।
जब निर्धारित प्रक्रिया बाधित हुई और चाबी-ताले का मिलान नहीं हो सका, तब अधिकारियों ने स्थिति को संभालने के लिए कठोर कदम उठाते हुए कुल चार स्ट्रॉन्ग रूम के ताले हथौड़े और छैनी की मदद से तोड़े।
हालांकि यह कदम तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी था, लेकिन इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पोस्टल बैलेट की गिनती सुबह 8 बजे और ईवीएम की गिनती 8:30 बजे शुरू होनी थी, लेकिन इस गड़बड़ी के चलते मतगणना में देरी हुई, जिससे प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में असंतोष भी देखने को मिला।
डिप्टी कमिश्नर जी.एम. गंगाधरस्वामी ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
चुनाव प्रक्रिया में स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और निगरानी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं ईवीएम और अन्य संवेदनशील सामग्री सुरक्षित रखी जाती है। ऐसे में चाबी का मेल न खाना और ताले तोड़ने की नौबत आना न केवल लापरवाही का संकेत है, बल्कि इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।