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ईबोला के नए स्ट्रेन ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

WHO ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी

 

अफ्रीका में एक बार फिर इबोला वायरस ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। यहां अब तक 300 से अधिक संदिग्ध मामले और 88 मौतें सामने आ चुकी हैं। इस बार संक्रमण इबोला के खतरनाक बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैल रहा है, जिसके लिए फिलहाल कोई वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है।

यह वही स्ट्रेन है, जिसकी पहली पहचान 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में हुई थी। उस समय इसने 116 से अधिक लोगों को संक्रमित किया था और करीब 34 से 40 प्रतिशत मरीजों की मौत हुई थी। अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के इटुरी प्रांत में 17वीं बार इबोला का प्रकोप सामने आया है, लेकिन इस बार वायरस का प्रकार अलग होने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला वायरस के तीन प्रमुख स्ट्रेन—जैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो—मनुष्यों में बड़े संक्रमण फैलाते हैं। इनमें जैरे स्ट्रेन सबसे घातक माना जाता है, जिसमें मृत्यु दर 60 से 90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन अपेक्षाकृत कम घातक है, लेकिन इसकी औसत मृत्यु दर भी 32 से 40 प्रतिशत के बीच रही है और कुछ मामलों में यह 50 प्रतिशत तक पहुंची है।

इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं। मरीज को अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी और थकान महसूस होती है। कुछ दिनों बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खराश शुरू हो जाती है। बीमारी गंभीर होने पर आंखों, मसूड़ों और शरीर के अन्य हिस्सों से खून बहना, सांस लेने में कठिनाई और अंगों के फेल होने जैसी स्थिति बन सकती है।

संक्रमण के लक्षण 2 से 21 दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, लार, दस्त और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। मृत संक्रमित व्यक्ति के शव को छूना या अंतिम संस्कार की पारंपरिक रस्में निभाना भी अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता है। हालांकि यह वायरस हवा, पानी या कीड़ों से नहीं फैलता। चमगादड़ों को इसका प्रमुख प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। 

World Health Organization के अनुसार, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। मरीजों का उपचार मुख्य रूप से सपोर्टिव केयर के जरिए किया जाता है, जिसमें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करना, बुखार और दर्द को नियंत्रित करना, तथा जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन और ब्लड ट्रांसफ्यूजन देना शामिल है।

स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमित लोगों को तुरंत आइसोलेट करने, संपर्क में आए लोगों की निगरानी करने और सुरक्षित अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने पर जोर दे रही हैं। WHO ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक लगाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सीमा क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ाना आवश्यक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कांगो और युगांडा के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था संक्रमण नियंत्रण में बड़ी बाधा बन रही हैं। किंशासा और कंपाला जैसे बड़े शहरों में भी कुछ मामले सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है।