राजकरण

सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक, पीएम मोदी ने बताया इसका महत्व

सेवा तीर्थ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में पीएम मोदी ने स्थल के ऐतिहासिक और प्रेरणादायक महत्व को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कियुगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन आयोजित इस बैठक में देशहित में कई अभूतपूर्वनिर्णय लिए गए। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘’आज युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नवनिर्मित सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की प्रथम बैठक हुई। इसमें देश के लिए कई अभूतपूर्वनिर्णय लिए गए।

इस दौरान, कैबिनेट ने ये संकल्प भी लिया कि स्वदेशीसोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों के अनंत सामर्थ्य की बुनियाद पर बना सेवा तीर्थ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा। इस राष्ट्रयज्ञ में हमारा मंत्र है - यद् भद्रं तन्न आ सुव॥ अर्थात्, जो कुछ शुभ और कल्याणकारी है, जो भी नए विचार हैं, वो हमें अनवरत प्राप्त होते रहें।’’ बैठक के दौरान मंत्रिमंडल ने संकल्पलिया कि स्वदेशीसोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों की सामर्थ्य पर आधारित ‘सेवा तीर्थ’ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा।

इस अवसर पर वैदिक मंत्र ‘यद् भद्रं तन्न आ सुवः’ का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जो भी शुभ और कल्याणकारी विचार हों, वे निरंतर प्राप्त होते रहें। ‘सेवा तीर्थ’ को नए भारत के नवनिर्माण की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति बताया गया। आजादी के बाद दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालयसाउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा। नया परिसर उन अस्थायी बैरकों की जगह बना है, जो ब्रिटिश काल में निर्मित थे। इसे गुलामी के प्रतीकों से आगे बढ़ते हुए आत्मविश्वासी और आधुनिक भारत के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। मंत्रिमंडल ने दोहराया कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा। शासन की कार्य-संस्कृति संविधान के मूल्यों- गरिमा, समानता और न्याय के अनुरूप संचालित की जाएगी। पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। बीते वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। आयष्मा ु न भारत के तहत करोड़ों नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली, जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से लगभग 80 करोड़ लोगों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाई गई।