लोकसभा में
परिसीमन और महिला आरक्षण पर
शुक्रवार को जारी बहस के दौरान गृह
मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब
दिया। इस दौरान अमित शाह ने कहा कि,
इस संशोधन विधेयक का विपक्ष विरोध
कर रहा है। इससे पहले लोकसभा के
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार को
घेरते हुए कहा था कि पार्टी महिलाओं
के मुद्दे के पीछेछिपकर देश के चुनावी
नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही
है।
महिलाओं को आरक्षण देने की बजाय
असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी
विरोध कररहा विपक्ष
बिल पर चर्चा के दौरान जवाब
देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,
बोलने के समय सबने कहा कि हम
पक्ष में हैं। इंडी अलायंस के सदस्यों ने
अगर-मगर, किंतु-परंतु करके महिला
आरक्षण का विरोध किया है। मुझे लगा
कि इम्प्लीमेंटेशन के तरीके का विरोध
हो है, लेकिन नहीं।
केवल और केवल
महिला आरक्षण का विरोध है। ये तरीकों
का नहीं, बिल का विरोध है। बिल का
उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है। किसी
किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं।
संविधान में इसका अधिकार सरकार के
पास है। जो सीटें बढ़ाने का विरोध कररहे
हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी
की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं।
संविधान में परिसीमन का प्रावधान है।
अमित शाह ने कहा, देश की जनता
निर्णय करती है। जनता चुनकर सदन में
भेजती है। परिसीमन के दौरान रोड, रेलवे
आदि की स्थिति को भी सदन में बताया
जाएगा।
मोदी जी के नेतृत्व में सरकार यह
संविधानिक सुधार लेकर आई है। साल
1971 में कांग्रेस सरकार थी। उस वक्त
सीटों को फ्रीज कर दी गई थी। 71 से
अबतक सीटों की संख्या अब तक फ्रीज
रही। 127 सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से
ज्यादा मतदाता हैं। कोई मुझे बताए कि
कोई भी सांसद इतने मतदाताओं वाले
लोकसभा सीट को कैसे ठीक से देख
सकता है। गृह मंत्री ने आगे कहा, 1976 में
कांग्रेस पार्टी ने ही परिसीमन से जनता को
वंचित रखा था। अब भी कांग्रेस ही जनता
को इससे वंचित कररही है।
50 वर्षों तक
देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात
में अधिकार नहीं मिला। परिसीमन आयोग
का एक नियम है, हर लोकसभा सीट पर
जाकर एक-एक जनता से जानकारी लेती
है। इसलिए इसमें समय लग सकता है। ये
जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव
के दौरान ही इसे लागू किया जाए। 2029
में महिला आरक्षण देना है तो परिसीमन
देना जरूरी है। गृह मंत्री ने कहा, 1976 में
देश की आबादी थी 56.79 अब आबादी
काफी बढ़ गई है।
सरकार का दायित्व है
सदन के सदस्यों की संख्या बढ़े। अगर
2011 की जनगणना को आधार बनाया
जाए तो हम 50 फीसदी हर राज्य में सीटें
बढ़ाने की बात कर रहे हैं। कोरोना के
कारण जनगणना नहीं हो पाया। कोरोना
समाप्त होने के बाद देश को काफी समय
लगा इससे उबरने में।