राजकरण

सुप्रीम कोर्ट ने झूठे मामलों में अंकुश लगाने के लिए दायर जनहित याचिका पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा

झूठे मामलों में अंकुश लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है।

 सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र सरकार और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पुलिस स्टेशनों और सार्वजनिक कार्यालयों में डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें झूठी शिकायतें, मनगढ़ंत आरोप और झूठे सबूत दाखिल करने के दंडात्मक परिणामों को उजागर किया गया हो। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत दलीलों को सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की किबंधुत्व का संवैधानिक सिद्धांत सामाजिक आचरण का मार्गदर्शन करना चाहिए और चेतावनी दी कि झूठेमामलों के माध्यम से आपराधिक कानून का दुरुपयोग निर्दोष नागरिकों के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा, “समस्या तब उत्पन्न होती है जब झूठी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। याचिका में पुलिस स्टेशनों, तहसील कार्यालयों, जिला न्यायालयों, पंचायत भवनों, नगरपालिका कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में डिस्प्लेबोर्ड लगाने की मांग की गई है, जिसमें नागरिकों को झूठी शिकायतें, झूठे आरोप, झूठेबयान और मनगढ़ंत सबूत दाखिल करने के कानूनी परिणामों के बारे में सूचित किया जाए। इसमें तर्कदिया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत निर्दोष नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार की रक्षा करने और व्यक्तिगत या राजनीतिक प्रतिसंतुष्टि को निपटाने के लिए आपराधिक कानून प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए ऐसे निवारक उपाय आवश्यक हैं। इस जनहित याचिका में राज्य के अधिकारियों को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वे एफआईआर दर्ज करने या कोई भी शिकायत स्वीकार करने से पहले शिकायतकर्ताओं को झूठी शिकायत दर्ज करने के कानूनी परिणामों के बारे में सूचित करें।