स्वामी
विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में
स्वामी विवेकानंद के जीवन, साहित्य एवं
शाश्वत दर्शन पर आधारित दो दिवसीय
पुस्तक प्रदर्शनी का समापन हुआ। नववर्ष
के अवसर पर आयोजित यह प्रदर्शनी
विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद
शोध पीठ द्वारा रामकृष्ण मठ, पुणे के
सहयोग से संपन्न हुई, जिसने विद्यार्थियों,
शोधार्थियों एवं शिक्षाजगत से जुड़े लोगों
के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया।
समापन दिवस पर कार्यक्रम का
आरंभ श्रद्धा एवं गरिमा के वातावरण में
हुआ। उपाधि महाविद्यालय, पीलीभीत के
प्राचार्यप्रो. (डॉ.) दुष्यंत कुमार ने स्वामी
विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर
पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर
विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी
एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित
रहे, जिनकी सहभागिता ने आयोजन
को सार्थक बनाया। विश्वविद्यालय की
मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.)
शल्या राज ने अपने संबोधन में प्रदर्शनी
के शैक्षणिक एवं वैचारिक महत्व पर
प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के
आयोजनों से विश्वविद्यालय का बौद्धिक
वातावरण समृद्ध होता है तथा मूल्यआधारित शिक्षा को सशक्त आधार
मिलता है। आयोजन का संचालन स्वामी
विवेकानंद शोध पीठ की संयोजिका प्रो.
(डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा के कुशल नेतृत्व
में हुआ। उनके साथ डॉ. अजय कुमार
वर्मा के सक्रिय सहयोग से कार्यक्रम
सुव्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संपन्न
हुआ। प्रदर्शनी की प्रमुख विशेषता इसका
विशाल संग्रह रहा, जिसमें लगभग पाँच
हजार पुस्तकों को विभिन्न श्रेणियों में
प्रदर्शित किया गया।
इनमें स्वामी विवेकानंद के मौलिक
ग्रंथ, वेदांत पर आधारित टीकाएँ, योग
एवं ध्यान साहित्य, शिक्षा और समाजसुधार से संबंधित लेखन, जीवनियाँ,
शोध-प्रकाशन तथा विभिन्न भाषाओं में
अनूदित कृतियाँ शामिल रहीं। इस संग्रह
ने आगंतुकों को उनके विचारों को गहराई
से समझने का अवसर प्रदान किया।
विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के
विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी का
अवलोकन किया और स्वामी विवेकानंद
के विचारों को अपने शैक्षणिक एवं
व्यक्तिगत जीवन से जोड़ने का प्रयास
किया। शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने
मूल्यपरक शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय
की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।