ट्रंप की कैद में चीन का ‘सदाबहार दोस्त’, UN में भिड़े दोनों देश, अमेरिका को मिली चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस समय अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में हुई हालिया बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस ने वैश्विक माहौल को गर्म कर दिया है।
चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक हितों के लिए वैश्विक संस्थाओं का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि ने चीन की विदेश नीति और उसके ‘सदाबहार दोस्त’ माने जाने वाले देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजिंग अपने सहयोगियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
चीन का पलटवार और चेतावनी
चीन के प्रतिनिधि ने जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका अब भी “शीत युद्ध मानसिकता” से बाहर नहीं निकल पाया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर वॉशिंगटन अपनी ‘हस्तक्षेपकारी नीतियों’ को जारी रखता है, तो उसे कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
‘सदाबहार दोस्त’ की भूमिका
इस पूरे विवाद में चीन के उस सहयोगी देश का भी नाम उछला, जिसे बीजिंग अपना ‘सदाबहार दोस्त’ कहता है। यह देश, जो हाल के महीनों में पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, अब खुलकर चीन के साथ खड़ा नजर आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र में इस देश ने चीन के समर्थन में बयान देकर अमेरिका की नीतियों की आलोचना की।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती खींचतान से वैश्विक कूटनीति, व्यापार और सुरक्षा ढांचे पर गहरा असर पड़ सकता है। कई देश अब तटस्थ रुख अपनाने की कोशिश में हैं ताकि वे किसी भी बड़े शक्ति संघर्ष का हिस्सा न बनें।
निष्कर्ष:
UN में हुआ यह नया टकराव इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ सकता है। दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की बजाय अब अविश्वास और शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी है — और इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति पर साफ दिखाई दे रहा है।