भारत के तेजी
से बढ़ते क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बड़े
नीतिगत बदलाव के तहत, केंद्र सरकार
ने ‘10 मिनट की डिलीवरी’ की अनिवार्य
समय सीमा को समाप्त करने का निर्देश
दिया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री
मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद,
ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी
जैसे प्रमुख एग्रीगेटर्स ने इस दबावपूर्ण
डेडलाइन को हटाने पर सहमति व्यक्त
की है। यह कदम सीधे तौर पर लाखों ‘गिग
वर्कर्स’ की सुरक्षा और उनके कामकाजी
हालातों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से
उठाया गया है।
सरकार के इस निर्देश का असर
धरातल पर दिखने लगा है।
सूत्रों के
अनुसार, ब्लिंकिट ने अपनी ब्रांडिंग से
‘10 मिनट’ का वादा हटा दिया है। कंपनी
ने अपनी प्रमुख टैगलाइन को बदलकर
अब “30,000 से अधिक उत्पाद आपके
दरवाजे पर वितरित” कर दिया है, जो
पहले “10 मिनट में 10,000 से अधिक
उत्पाद” हुआ करती थी।
इस नीतिगत बदलाव के पीछे मुख्य
कारण डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ने वाला
मानसिक और शारीरिक दबाव है।
सार्वजनिक मंचों पर यह बहस तेज थी कि
अत्यधिक दबाव और कभी-कभी खराब
मौसम की स्थिति में ये कर्मचारी ‘दर्द और
दुख’ का सामना करते हैं।
संसद में गिग वर्कर्स के मुद्दे पर क्या
हुआ?
संसद के हालिया सत्र में भी क्विक
कॉमर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर
सवाल उठाए गए थे। आम आदमी
पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद
राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के लिए उचित
वेतन, सम्मान और सुरक्षा की मांग करते
हुए नियामक ढांचे की आवश्यकता
पर जोर दिया था।
उन्होंने तर्क दिया कि
ऐप-आधारित डिलीवरी व्यवसायों को
सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के
लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
क्या है सोशल सिक्योरिटी कोड
2020?
गिग और प्लेटफॉर्म वरर्स ्क के हितों की
रक्षा के लिए सरकार ने कानूनी मोर्चे पर भी
तैयारी पूरी कर ली है-
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: यह
कोड 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी हो
गया है, जिसमें पहली बार ‘गिग वर्कर्स’
और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ को स्पष्ट रूप से
परिभाषित किया गया है।
कल्याणकारी योजनाएं: इस कोड
के तहत जीवन और विकलांगता कवर,
दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व
लाभ, और वृद्धावस्था के दौरान संरक्षण
जैसे सामाजिक सुरक्षा उपाय शामिल किए
गए हैं।
सोशल सिक्योरिटी फंड:
कल्याणकारीयोजनाओं के वित्तपोषण के
लिए एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष
और एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
कीस्थापना का प्रावधान किया गया है।