राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
की ओर से भारतीय निर्यात पर भारी भरकम
50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बावजूद भारत के
साथ अमेरिका का व्यापार घाटा (वस्तु और
सेवा) बढ़कर 2025 में 58.2 अरब डॉलर हो
गया है यह पहले 45.7 अरब डॉलर के करीब
था। यह जानकारी अमेरिकी सरकार की ओर
से दी गई। अमेरिकी सरकार द्वारा बताया गया
कि दिसंबर में अमेरिका का व्यापार घाटा (वस्तु
और सेवा) 70.3 अरब डॉलर रहा है, जो कि
नवंबर में 53 अरब डॉलर था। वहीं, दिसंबर में
भारत के साथ व्यापार घाटा 5.2 अरब डॉलर
रहा है। पूरे 2025 के लिए अमेरिका का व्यापार
घाटा 901.5 अरब डॉलर रहा है, जो कि 2024
में 903.5 अरब डॉलर था।
इस दौरान निर्यात
199.8 अरब डॉलर बढ़कर 3,432.3 अरब
डॉलर हो गया है। वहीं, आयात 197.8 अरब
डॉलर बढ़कर 4,333.8 अरब डॉलर हो गया
है। 2025 में वस्तुओं से व्यापार घाटा 25.5
अरब डॉलर बढ़कर 1,240.9 अरब डॉलर हो
गया है। सेवाओं से अधिशेष 27.6 अरब डॉलर
बढ़कर 339.5 अरब डॉलर हो गया है।
2025 में अमेरिका का व्यापार घाटा
यूरोपीय यूनियन से 218.8 अरब डॉलर, चीन
से 202.1 अरब डॉलर, मैक्सिको से 196.9
अरब डॉलर, वियतनाम से 178.2 अरब डॉलर
और ताइवान से 146.8 अरब डॉलर रहा है।
इसके अलावा, ट्रंप टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम
कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए, इसे गैर-कानूनी
बताते हुए रद्द कर दिया है। हालांकि, धारा 122
का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने 150 दिनों
की अवधि के लिए अमेरिका में आयातित
वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया
है।
यह अस्थायी आयात शुल्क 24 फरवरी से
लागू होगा। ट्रंप ने ‘ट्रेड एक्ट 1974 की धारा
122’ के तहत दी गई शक्ति का प्रयोग किया है।
इसके तहत राष्ट्रपति सरचार्ज और अन्य विशेष
आयात प्रतिबंधों के माध्यम से कुछ ‘आधारभूत
अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं’को संबोधित
कर सकते हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी
की गई एक फैक्टशीट के मुताबिक,अमेरिका
के सामने आने वाली आधारभूत अंतरराष्ट्रीय
भुगतान समस्याओं का अधिक प्रभावी ढंग
से समाधान करने के लिए कुछ वस्तुओं पर
अस्थायी आयात शुल्क लागू नहीं होगा। इनमें
कुछ महत्वपूर्ण खनिज, मुद्रा और बुलियन में
उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा
उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक,
कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और
फार्मास्यूटिकल सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स,
यात्री वाहन और अन्य उत्पाद शामिल हैं।