सुप्रीम कोर्ट ने
बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े एक
मामले की सुनवाई के दौरान तीखी और
बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए सवाल
उठाया कि आखिर आम लोग कब तक
कुत्तों के कारण परेशानी झेलते रहेंगे।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं,
बल्कि केवल संस्थागत परिसरों—जैसे
स्कूल, अस्पताल और अदालतों—के
भीतर लागू होगा। करीब ढाई घंटे तक
चली सुनवाई के दौरान कुत्तों के “मूड”,
“काउंसलिंग”, “कम्युनिटी डॉग्स”
और “इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स” जैसे
शब्दों पर भी बहस हुई, जिस पर पीठ
ने व्यंग्यात्मक लहजे में नाराजगी जाहिर
की।
पीठ ने सवाल किया कि स्कूलों,
अस्पतालों और कोर्ट परिसरों के अंदर
आवारा कुत्तों की क्या आवश्यकता है?
अगर इन्हें इन जगहों से हटाया जाए,
तो इसमें आपत्ति किसे और क्यों होनी
चाहिए? अदालत ने कहा कि इन परिसरों
में बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की
सुरक्षा सर्वोपरि है।
आवारा कुत्तों के पक्ष में दलील दे रहे
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि
जो कुत्ता काटता है, उसकी नसबंदी की
जा सकती है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखा तंज कसते
हुए कहा—“अब तो बस यही बाकी है
कि कुत्तों की भी काउंसलिंग कराई जाए,
ताकि वापस छोड़े जाने पर वे काटें नहीं।
”
कपिल सिब्बल के इस तर्क पर कि
उन्हें कभी मंदिरों या सार्वजनिक स्थानों
पर कुत्तों ने नहीं काटा, अदालत ने जवाब
दिया—“आप खुशकिस्मत हैं। लोगों
को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा
रहा है, लोग मर रहे हैं।” कोर्ट ने कहा कि
आवारा कुत्तों से दुर्घटनाओं का भी खतरा
होता है। सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस
मूड में है, यह कोई नहीं जान सकता।
अदालत ने सरकार से पूछा कि 2018
में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) को
लेकर जो सख्त निर्देश दिए गए थे, उनका
सही तरीके से पालन क्यों नहीं हुआ।
नियमों के क्रियान्वयन में देरी से जनता
को नुकसान नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि यह
मामला केवल पशु संरक्षण का नहीं,
बल्कि मानव जीवन और सार्वजनिक
सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। मामले की अगली
सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10.30 बजे
होगी। यह टिप्पणी उस सामाजिक बहस
को और तेज करती है, जहां एक तरफ
पशु अधिकारों की बात है, तो दूसरी ओर
बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की
रोजमर्रा की सुरक्षा का सवाल खड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए
कहा कि ऐसा कोई प्रावधान होना चाहिए
जिसके तहत गेटेड कम्युनिटी मतदान के
जरिए फैसला ले सके। वकील वंदना जैन
ने कहा, ‘हम कुत्तों के खिलाफ नहीं हैं।
हमें कुत्तों के खतरे और सार्वजनिक सुरक्षा
को देखना होगा। 6.2 करोड़ कुत्तों की
आबादी है और स्थिति नियंत्रण से बाहर
होती जा रही है।’ मामले की सुनवाई कल
भी जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर
सवाल करते हुए कहा, ‘क्या कुत्तों को
यह सिखाया जा सकता है कि वे किसी
को न काटें? किसी को कैसे पता चलेगा
कि कौन सा कुत्ता काटने के मूड में है या
नहीं?’