बेबाक बात

शिक्षामित्रोंका मानदेय अब 18 हजार रुपये प्रतिमाह

यूपी कैबिनेट के फैसले : 25 लाख युवाओं को दिए जाएंगे टैबलेट

उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय लगभग दोगुना कर दिया है। यूपी के 52 जनपदों में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस अड्डों के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। इसके अलावा बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण होगा। वहीं, स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत युवाओं को निःशुल्कवितरण के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश सरकार ने 1.43 लाख शिक्षामित्रों व 24 हजार अनुदेशकों का नौ साल का सूखा खत्म किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि को स्वीकृति दी गई। यह अप्रैल से लागू होगा और मई के भुगतान में इनको बढ़ा हुआ मानदेय मिलेगा। कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि 2017 में 10 हजार रुपये निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर अब 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9000 से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय एक अप्रैल से प्रभावी होगा और मई में होने वाले वेतन भुगतान में यह बढ़कर आएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकार के 60:40 अनुपात में मिलता रहा है। मानदेय वृद्धि के बाद इन पर आने वाला 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय प्रदेश सरकार वहन करेगी।

शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका मानदेय भुगतान पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। उनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार भी राज्य सरकार वहन करेगी। संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। मानदेय वृद्धि के निर्णय से इनको भी बड़ी राहत मिलेगी। इस पर 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को सरकार की तरफ से बड़ी सौगात देते हुए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत युवाओं को निःशुल्क वितरण के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।

जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर टैबलेट वितरित किया जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना में 2000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। योजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, इससे केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में महापुरुषों की विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए योगी सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों के विकास का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘डा० बी०आर० आंबेडकर मूर्तिविकास योजना’ को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियों का संरक्षण, सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके अंतर्गत योगी सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथसाथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षिवाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण करेगी। इसके साथ ही आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां स्थानीय जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक, एमएलसी) जनता को इस योजना और चयनित स्थलों के बारे में जानकारी भी देंगे।

 

यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें जनोपयोगी केंद्र के रूप में भी विकसित करेगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 स्मारकों का विकास किया जाएगा। प्रति स्मारक 10 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसके अंतर्गत कुल 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्मारकों के आसपास बाउंड्रीवॉल, छत्र निर्माण, सौंदर्यीकरण, हरियाली का विकास और प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। योजना का उद्देश्यसिर्फ मूर्यों ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आसपास के क्षेत्रों को विकसित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करना है। निर्माण कार्यों के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।