राजकरण

मेरठ में ‘एम्स’ अब केवल मांग नहीं, जनता की जरूरत है : लक्ष्मीकांत

45 राज्यसभा सांसदों का समर्थन मिलने से बढ़ी उम्मीद

राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने शून्यकाल में मेरठ में एम्स या उसके समकक्ष संस्थान की स्थापना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। डा. लक्ष्मीकांत के इस विषय का राज्यसभा के 45 सांसदों ने समर्थन किया है, जिससे मेरठ में एम्स स्थापना की संभावना बढ़ गई है। डा. लक्ष्मीकांत ने राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि भारत सरकार सामान्य जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयासरत और संकल्पित है। आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जिलों व 6 मंडलों की कुल जनसंख्या 7,12,38,503 है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि मेरठ में एम्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल उपलब्ध हो जाएं तो न केवल मेरठ बल्कि आसपास के दर्जनों जिलों के मरीजों को भी गंभीर बीमारी की हालत में दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। वर्तमान में मेरठ में मेडिकल सुविधाओं के स्तर को देखते हुए ह्रदय रोग, गैस्ट्रो, श्वसन संबंधी रोग एवं कैंसर के गंभीर मरीजों का बेहतर ईलाज संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मेरठ और आसपास के जिलों में रहने वाले लोगों की यह मांग है कि मेरठ में एम्स की स्थापना हो, क्योंकि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को इलाज हेतु दिल्ली एम्स या निजि अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। डा. लक्ष्मीकांत ने कहा कि रायबरेली और गोरखपुर में एम्स होने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश के काफी संख्या में लोग एम्स, दिल्ली में इलाज कराने आते हैं, जिसमें ज्यादा मरीज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के होते हैं। अगर मेरठ में एम्स की स्थापना हो जाती है तो दिल्ली के एम्स पर भी भार कम हो जाएगा। डा. लक्ष्मीकांत ने कहा मेरठ एक ट्रांजिट हब है और मरीज को गोल्डन ऑवर के भीतर इलाज देना संभव नहीं हो पा रहा है। एम्स की स्थापना के बाद