विश्व हिंदी दिवस पर
मकाम मीडिल ईस्ट और काउंसलर जनरल
ऑफ इंडिया (दुबई) के संयुक्त तत्वाधान
में काव्य समारोह आयोजित किया गया। इस
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी, प्रवासी
भारतीय शामिल हुए और विविध विषयों
की सुंदर रचनाओं का रसपान किया गया।
शनिवार 10 जनवरी की सुबह दुबई स्थित
भारत के प्रधान कौंसलावास के परिसर का
नजारा कुछ अलग ही था, अवकाश का दिन
होने के बावजूद बड़ी संख्या में सजे-धजे लोग
होंठो पर मुस्कान लिए परिसर में दाखिल हो रहे
थे। इस मुस्कान की वजह थी, अपनी मातृभाषा
और साहित्य के करीब जाने का अवसर, जो
उन्हें अंतरराष्ट्रीय महिला काव्य मंच, दुबई
द्वारा मुहैया करवाया गया।
काव्य समारोह की मुख्य अतिथि भारत से
आयी, मकाम की वैश्विक अध्यक्ष (ग्लोबल
प्रेसिडेंट) शालू गुप्ता जी एवम विशिष्ट
अतिथि प्रहरी मंच के वैश्विक सलाहकार
मुकेश गुप्ता जी रहे। विशेष अतिथि के रूप में
हर एक्सीलेंसी लैला रेहाल, अल अतफानी,
संस्थापक अध्यक्ष बिजनेस गेट, और ऑय
एम अफ्रीका प्लेटफॉर्म थी।
कार्यक्रम के
दूसरे विशेष अतिथि सी.बी.एस.ई, क्षेत्रीय
कार्यालय दुबई के निदेशक डॉ रामशंकर जी
रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला काव्य
मंच की विदेश उपाध्यक्ष एवं मीडिल ईस्ट की
प्रभारी स्नेहा देव जी ने की।
अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन एवं माँ
सरस्वती की वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ
हुआ।
सरस्वती वंदना की सुरमयी प्रस्तुति
दी- यूएई की गायिका सुरभि अगाशे ने। ईश्वर
की अराधना के बाद शॉल और पौधें देकर
अतिथियों का स्वागत और परिचय सम्पन्न
हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि शालू गुप्ता
जी ने सुरीले अंदाज में मकाम का ध्येय गीत
प्रस्तुत किया। तत्पश्चात अध्यक्षा, नेहा देव
जी ने उपस्थित श्रोताओं को महिला काव्य मंच
की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा के
बारे में सारगर्भित जानकारी दी और हिंदी के
महत्व पर अपनी बात रखी। इसके बाद क़तर
मकाम की अध्यक्ष शालिनी वर्मा की पुस्तक
‘फीफा की धूम’ का विमोचन अतिथियों द्वारा
किया गया।
विमोचन सत्र को संबोधित करते
हुए हर एक्सीलेंसी लैला रेहाल ने कहा कि
मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता हो रही है
कि एक महिला ने खेल के विषय पर कलम
चलाई है। महिलाएं अक्सर खेलों में कम रूचि
लेती है, इस किताब का विषय देखकर ही मैं
बहुत उत्साहित हूँ। अपने संबोधन के दौरान
उन्होंने सभी भारतवासियों को हिंदी दिवस की
शुभकामनाएं दीं।
पुस्तक विमोचन के बादविद्या और बुद्धि
के दाता भगवान श्री गणेश की वंदना नृत्य के
माध्यम से की गई। इस नृत्य की प्रस्तुति दी -
करूणा राठौर, कार्तिका शाजी, भावना नाईक
और आहना राठौर ने।
मनमोहक नृत्य के बाद
एक वीडियो के माध्यम से काव्य समारोह
के प्रतिभागी कवियों का परिचय दर्शकों से
करवाया गया। समारोह के प्रथम कवि के रूप
में श्रोताओं ने मकाम के संस्थापक नरेश गुप्ता
‘नाज’ सर का संदेश और उनका गीत ‘मेरा
तुमसे एक गीत का वादा है’ का आनंदलिया।
मंच पर प्रथम रचनाकार के रूप में बीकानेर
की बेटी कौसर भुट्टोदर्शकों से मुखातिब हुई।
उनकी सुंदर आवाज ने दर्शकों का मन मोह
लिया। दूसरे क्रम पर कावेरी शुक्ला ने अपनी
कविता ‘जाड़े की धूप’ की प्रस्तुति दी, उसके
बाद स्मृति गुप्ता ने सुंदर दोहे सुनाएं। वरिष्ठ
कवि आलोक शर्मा ने मृत्यु के विषय पर
कविता सुनाई।
इसके बाद शब्बीर मुन्नवर अपने चिरपरिचित अंदाज में दर्शकों से रूबरू हुए।
इसके बाद क्रमशः अनु बाफना, संचिता दास,
देवयानी ‘रानी’, कमला प्रकाश ‘जॉली’,
केतकी रैना, डॉ. सीमा उपाध्ये, शालिनी वर्मा,
निशा झा, कौशल अवस्थी, करूणा राठौर,
नूपुर दुबे, मधुलिका मोहता ने अपनी अपनी
प्रस्तुतियां दी और दर्शकों से खूब तालियां
बटोरी। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षा, नेहा
देव और मुख्य अतिथि शालू गुप्ता जी ने
अपनी रचनाएं पढ़ी। इस अवसर पर समारोह
के विशेष अतिथि डॉ रामशंकर ने विदशों में
हिंदी और हिंदी शिक्षण के महत्व पर अपनी
बात रखी।
विशिष्ट अतिथि और प्रहरी मंच के
सलाहकार मुकेश गुप्ता जी सभी कवियों को
शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि परिवार के
सहयोग के बिना कोई रचनाकार, रचनात्मक
कार्य नहीं कर सकता। अपनी सधी वाणी
से उन्होंने वहां मौजूद दर्शकों और कवियों
के परिजनों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम
का बेहतरीन संचालन मकाम की सदस्य
मधुलिका मोहता और नूपुर दुबे ने किया। दोनों
के सधे हुए संचालन और सटीक टिप्पणियों
ने तीन घंटे के इस कार्यक्रम के दौरान सभी
को बांधे रखा। अंत में सभी प्रतिभागियों और
दर्शकों ने सहभोज का आनंदलिया।