विपक्ष ने संसद
में रुपए की घटती कीमत, आर्थिक
असमानता, युवाओं के रोजगार व देश
में सामाजिक सद्भाव को मुद्दा उठाया।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ये
विषय उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट का
हवाला दिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय
रिपोर्ट भारत में लगातार बढ़ती आर्थिक
असमानता को उजागर कर रही हैं। उन्होंने
कहा कि केंद्र सरकार में 9 लाख 70 हजार
से अधिक पद खाली हैं। वहीं राज्यों, पुलिस
व पब्लिक सेक्टर आदि में मिलाकर 50
लाख से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं। राष्ट्रपति
के अभिभाषण प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए
नेता राज्यसभा में प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन
खड़गे ने कहा कि अमेरिका के साथ हुई
ट्रेड डील भारतीय किसान विरोधी है।
उन्होंने कहा कि यह किसान विरोधी ट्रेड
डील है; उन्होंने इसे विफल विदेश नीति
का नतीजा बताया। खड़गे ने कहा कि
विश्व मंच पर अमेरिका बार-बार भारत
का अपमान करता है।
राष्ट्रपति ट्रंप दावा
करते हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध
को ट्रेड डील की धमकी से रोका। खड़गे ने
कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों
पर हमले हो रहे हैं, फिर भी हमारी सरकार
चुप है। 1971 के बाद पहली बार चीन,
नेपाल व बांग्लादेश एक साथ आ रहे हैं।
नेपाल भारत के कालापानी व लिपुलेख
जैसे इलाकों को अपना बता रहा है। हमारा
चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ता
जा रहा है। चीन के साथ व्यापार घाटा 116
लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
खड़गे ने राज्यसभा में बोलते हुए कहा
कि जो लोग कभी चीन को लाल आंख
दिखाने की बात करते थे, वही अब चीन
के लिए ट्रेड का लाल कार्पेट बिछा रहे हैं,
जबकि चीन गलवान के बाद लद्दाख और
अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोक
रहा है।
चीन भारत के साथ आर्थिक रिश्ते
अपनी शर्तों पर तय कर रहा है। उन्होंने
कहा कि यह ट्रेड तब बढ़ रहा है जब
सरकार कहती है कि पहलगाम हमले के
बाद चीन पाकिस्तान को खुफिया मदद दे
रहा था, फिर भी उसका स्वागत किया जा
रहा है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति की
विफलताएं विदेश तक सीमित नहीं रहतीं;
वे आंतरिक सुरक्षा की चूक बनकर देश के
भीतर उठती हैं।
खड़गे ने कहा कि 2014 के बाद से
इस सरकार के कार्यकाल में 2300 से
अधिक आतंकी हमलों में एक हजार से
अधिक भारतीयों ने अपनी शहादत दी।
खड़गे ने कहा कि विदेश नीति को आप
घरेलू ध्रुवीकरण का हथियार बनाना चाहते
हैं।
चुनावी लाभ के लिए ऐसा दुरुपयोग
लोकतंत्र और विदेश नीति के लिए
खतरनाक है। उन्होंने कहा, “मैं सरकार से
जानना चाहता हूं कि वे किस प्रकार का
भारत बनाना चाहते हैं, प्रतीकात्मक भारत
या वास्तविक लोकतांत्रिक, समाजवादी,
धर्मनिरपेक्ष और संप्रभु भारत। न्यायिक
स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्रेम वाले
भारत से उनका परहेज दिखाई दे रहा है।
खड़गे ने कहा कि आपने गरीबों,
महिलाओं, वंचितों, पिछड़ों, दलितों,
आदिवासियों, छात्रों, अल्पसंख्यकों,
किसानों, और कामगारों के हितों पर चोट
पहुंचाई है और उनको निराश किया है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ बात करने से कुछ
नहीं होता; लोगों के लिए काम करना होता
है। उन्होंने कहा कि हम सोए हुए व्यक्ति
को तो उठा सकते हैं लेकिन जो सोने का
ढोंग कर रहा है उसे नहीं उठाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि क्या आप विकसित भारत
नफरत और विभाजन की बुनियाद पर
खड़ा करना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि
मणिपुर जला और सरकार मौन रही है। वहां
दो समुदायों के बीच हिंसा में कम से कम
200 लोगों की मौत हुई।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव
के लिहाज से देश बेहद खतरनाक दौर
से गुजर रहा है। हमारा देश कई धर्मों और
संस्कृतियों की जन्मभूमि रहा है, जहां सभी
लोग आपसी सद्भाव के साथ फले-फूले ह