राजकरण

समाज की एकता सर्वोपरि, इसे बनाए रखने के लिए हर कदम जरूरी

यूजीसी के नए नियमों पर संघ का बड़ा संदेश

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए इक्विटी नियमों को लेकर देशभर में चल रही बहस और सुप्रीम कोर्ट की रोक के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरआरएस) ने साफ किया है कि उसका मूल विश्वास समाज की एकता में है और उसे बनाए रखने के लिए संघ हर जरूरी कदम उठाएगा। मुंबई में मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए आरआरएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि समाज को जोड़कर रखना संघ की मूल विचारधारा का हिस्सा है। उन्होंने कहा संघ का विश्वास है कि समाज में एकता होनी चाहिए। इस एकता को बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक होगा, हम करेंगे। ‘मामला अदालत में है’ यूजीसी नियमों पर सवाल के जवाब में सुनील आंबेकर ने कहा कि चूंकि मामला न्यायालय के समक्ष है, इसलिए अलगअलग लोग अपनी राय रख रहे हैं। उन्होंने कहा अदालत ने इन दिशानिर्देशों पर रोक लगाई है। अलग-अलग विचार सामने आए हैं, लेकिन संघ का स्पष्ट मत है कि समाज की एकता बनी रहनी चाहिए। UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित यूजीसी नियम 2026 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ बनाने का प्रावधान किया गया था। इन समितियों में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया। हालांकि, इन नियमों को लेकर उठे विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन पर रोक लगा दी, यह कहते हुए कि यह ढांचाप्रथम दृष्टया अस्पष्ट है और इसके “बहुत दूरगामी और खतरनाक सामाजिक परिणाम” हो सकते हैं, जिससे समाज में विभाजन पैदा होने की आशंका है। आरआरएस की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए आंबेकर ने कहा कि 100 साल बाद संघ को यह बताने की जरूरत नहीं है कि उसने देश की संप्रभुता और एकता के लिए क्या किया। संघ की स्थापना ही इसी उद्देश्य से हुई थी। ठाणे में AIMIM के एक पार्षद द्वारा मुम्ब्रा को हरा रंग देने संबंधी बयान पर पूछे गए सवाल पर आंबेकर ने कहा इस देश का रंग हजारों वर्षों से केसरिया रहा है।