सुप्रीम कोर्ट
ने सोमवार आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ
याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस(AI) की मदद से बनाए गए सबूतों पर फैसला
लिखना गलत काम है। कोर्ट ने कहा कि ये कोई गलती से
होने वाला काम नहीं है।
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच
ने कहा कि इसके नतीजों और जवाबदेही की जांच करना
चाहते हैं क्योंकि इसका सीधा असर फैसले की प्रक्रिया
की ईमानदारी पर पड़ता है। कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी
जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया
है।
दरअसल, पिछले साल अगस्त में आंध्र प्रदेश की एक
ट्रायल कोर्ट ने विवादित प्रॉपर्टी के केस में AI से बनी तस्वीर
के आधार पर फैसला दिया था। फैसले के खिलाफ आंध्र
प्रदेश हाइकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी साल
जनवरी में हाइकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी। इसके
बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा
िक अगर किसी फैसले का आधार गैर-मौजूद या नकली
सबूत हों, तो यह सिर्फ गलती नहीं बल्कि गंभीर गलत
आचरण (मिसकंडक्ट) है। ऐसे मामले में कानूनी कारवाई ्र
हो सकती है। अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और बार
काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया जाता है।
ट्रायल कोर्ट ने केस के दौरान विवादित प्रॉपर्टी की स्थिति
देखने के लिए एक एडवोकेेट-कमिश्नर नियुक्तकिया था।
याचिकाकर्ताओं ने कमिश्नर की रिपोर्ट पर ऑब्जेक्शन
जताया। यह मामला फैसले के नतीजे से ज्यादा, न्याय देने
की प्रक्रिया (प्रोसेस) को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
बेंच पिटीशन पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई और उस
पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा, स्पेशल लीव पिटीशन
का निपटारा होने तक, हम निर्देश देते हैं कि ट्रायल कोर्ट
एडवोकेट-कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर आगे नहीं
बढ़ेगा। और मामले की सुनवाई 10 मार्च तय की। इससे
पहले 17 फरवरी को एक अलग मामले की सुनवाई करते
हुए कोर्ट ने AI टूल्स से तैयार की गई पिटीशन फाइल करने
के बढ़ते ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताई थी।