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मंगल होगा लाल: ट्रंप

अमेरिका ने ईरान को फिर दी नई धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है।

ट्रंप ने संभावित कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा कि मंगलवार को ईरान में “पावर प्लांट डे” और “ब्रिज डे” हो सकता है। वहीं, ट्रंप सोमवार को भारतीय समयानुसार रात 10:30 बजे ओवल ऑफिस से सैन्य अधिकारियों के साथ प्रेस को संबोधित करेंगे और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलो, वरना गंभीर परिणाम के लिए तैयार हो जाओ।” पोस्ट के अंत में उन्होंने “अल्हम्दुलिल्लाह” भी लिखा। ट्रंप की पोस्ट में “मंगलवार, रात 8:00 बजे (ईस्टर्न टाइम)” का भी जिक्र था। उनकी यह भाषा कूटनीतिक मर्यादाओं से हटकर मानी जा रही है। बता दें कि ईरान को दी गई 48 घंटे की चेतावनी सोमवार को पूरी हो रही है।

इधर, ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका के लापरवाह कदम पूरे क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन की नीतियां हर परिवार के लिए “जीता-जागता नरक” बन सकती हैं।

ट्रंप के बयान के बाद तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका Benjamin Netanyahu के नक्शेकदम पर चलेगा, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। गालिबाफ ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका नेतन्याहू के दबाव में काम कर रहा है और इसी वजह से हालात और बिगड़ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि युद्ध से अमेरिका को कोई फायदा नहीं होगा।

करीब 48 घंटे तक चले एक खतरनाक मिशन के बाद ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाके से एक अमेरिकी एयरफोर्स अधिकारी को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस ऑपरेशन में एयरस्ट्राइक, कमांडो और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। ट्रंप ने मिशन की जानकारी देते हुए कहा, “हमने उसे ढूंढ लिया!”

यह अधिकारी F-15E Strike Eagle फाइटर जेट का हिस्सा था, जिसे ईरानी बलों ने मार गिराया था। पायलट के पास एक पिस्टल, एक बीकन और सीमित संसाधन थे, लेकिन उम्मीद थी कि रेस्क्यू टीम समय पर पहुंच जाएगी।

विमान गिरने के बाद पायलट ने पैराशूट से सुरक्षित लैंडिंग की, लेकिन वह दुश्मन के इलाके में जा गिरा। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह लगभग दो दिनों तक ईरानी बलों से बचते हुए छिपा रहा, जो उसकी लगातार तलाश कर रहे थे।

पायलट के पास एक पिस्टल, डिस्टेस बीकन, GPS ट्रैकर और सुरक्षित संचार उपकरण थे, जिनकी मदद से वह अमेरिकी सेना के संपर्क में बना रहा और अपनी लोकेशन साझा करता रहा। ईरानी सेना ने उसकी तलाश में इनाम भी घोषित किया था और स्थानीय लोगों की मदद ले रही थी।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अधिकारी ने ऊंचे इलाकों में छिपकर और अपनी लोकेशन गुप्त रखकर लगभग दो दिनों तक गिरफ्तारी से बचाव किया। जिस इलाके में विमान गिरा था, वहां ईरान सरकार के विरोधी समूहों की मौजूदगी की भी बात कही गई है, जिससे यह संभावना जताई गई कि उसे स्थानीय स्तर पर भी मदद मिली हो सकती है।

जब अमेरिकी सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तो वह किसी हॉलीवुड फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा था। ट्रंप के निर्देश पर, अत्याधुनिक हथियारों से लैस दर्जनों विमानों को तैनात किया गया। इस मिशन में स्पेशल ऑपरेशन फोर्स, फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर, साइबर, स्पेस और इंटेलिजेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।

दर्जनों लड़ाकू विमानों, हमलावर हेलीकॉप्टरों और विशेष कमांडो दस्तों ने अंधेरे का फायदा उठाकर ईरान में प्रवेश किया। इस दौरान अमेरिकी विमानों ने ईरानी काफिलों पर बमबारी की, ताकि वे पायलट तक न पहुंच सकें। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसे अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन के इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक बताया।

रेस्क्यू ऑपरेशन रात के अंधेरे में शुरू हुआ। अमेरिकी विमानों ने उस इलाके की ओर बढ़ रहे ईरानी काफिलों पर हमला किया। निकासी क्षेत्र के पास फायरफाइट भी हुई। भारी दबाव के बावजूद एयरमैन अपनी स्थिति पर डटा रहा, जब तक कि रेस्क्यू टीम वहां नहीं पहुंच गई। वह घायल हुआ, लेकिन उसके ठीक होने की उम्मीद है।

ऑपरेशन के दौरान एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर फायरिंग हुई, जिसमें कुछ क्रू मेंबर घायल हो गए, हालांकि हेलीकॉप्टर सुरक्षित उतर गया। एक A-10 Thunderbolt II विमान भी मिशन के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ और उसके पायलट को पर्शियन गल्फ के ऊपर इजेक्ट करना पड़ा, जिसे बाद में सुरक्षित बचा लिया गया।

मिशन के दौरान दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के अंदर एक दूरस्थ बेस पर खराब हो गए, जिसके बाद अतिरिक्त विमान बुलाने पड़े। अमेरिका का दावा है कि इन विमानों को दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए वहीं नष्ट कर दिया गया। रेस्क्यू किए गए एयरमैन को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया।

हालांकि, ईरान का दावा है कि इस विमान को Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने मार गिराया था।