उत्तर प्रदेश के गोरखपुर
में शिक्षामित्र सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमत्ं री
योगी आदित्यनाथ ने मानदेय बढ़ोतरी के फैसले
को सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण
बताते हुए शिक्षामित्रों को सकारात्मक सोच
और जिम्मेदारी के साथ काम करने की नसीहत
दी। उन्होंने कहा कि संवाद के जरिए समाधान
संभव है, जबकि टकराव की राजनीति समाज
और शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है।
मुख्यमंत्री योगी ने मंगलवार को गोरखपुर में
आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह में कहा
कि वर्षों से लंबित मांगों को उनकी सरकार ने
संवेदनशीलता के साथ हल किया है, लेकिन
इसके लिए टकराव नहीं, बल्कि संवाद का
रास्ता अपनाना जरूरी है।
सीएम योगी ने कहा
कि पूर्ववर्ती सरकारों ने नियमों का उल्लंघन
करते हुए शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने
का प्रयास किया, जो विधि विरुद्ध था। इस पर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्रों की
सेवाएं समाप्त होने का संकट खड़ा हो गया था।
उनकी सरकार के सामने डेढ़ लाख परिवारों के
सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट था।
उन्होंने आगे बताया कि उनकी सरकार ने
2017 में शिक्षामित्रों की सेवाएं समाप्त करने
के बजाय उन्हें बनाए रखने का निर्णय लिया
और उनका मानदेय 3,500 रुपए से बढ़ाकर
10,000 रुपए किया। उन्होंने यह भी कहा कि
सरकार समय-समय पर मानदेय बढ़ाने की
इच्छुक थी, लेकिन कुछ लोगों ने शिक्षामित्रों के
बीच भ्रम और शोषण की स्थिति पैदा की।
मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को संबोधित करते
हुए कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पढ़ाना
नहीं, बल्कि समाज की दिशा तय करना भी
है। नकारात्मक सोच समाज के लिए घातक
हो सकती है, जबकि सकारात्मक दृष्टिकोण
से बेहतर पीढ़ी का निर्माण संभव है। एक बच्चे
का स्कूल छोड़ना राष्ट्रीय क्षति है। सरकार ने
बालिकाओं की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए
स्कूलों में पेयजल, शौचालय और सुरक्षा जैसी
मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी है। साथ
ही, 1.60 करोड़ से अधिक बच्चों को यूनिफॉर्म,
बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर जैसी
सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो 2017
से पहले संभव नहीं था।
सीएम योगी ने कहा
किशिक्षामित्रों को ट्रेड यूनियन कीप्रवृत्ति से दूर
रहना चाहिए, क्योंकि इससे समाज को नुकसान
होता है। उन्होंने कहा कि ‘पहले देश, तब हम’
की भावना के साथ कार्य करने पर ही समाज
और राष्ट्र दोनों सुरक्षित रह सकते हैं। मुख्यमंत्री
ने ‘स्कूल चलो अभियान’ का उल्लेख करते हुए
बताया कि पहले चरण में 20 लाख से अधिक
बच्चों का नामांकन हुआ है, जो एक बड़ी
उपलब्धिहै। उन्होंने आगामी चरण में इस संख्या
को और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।