तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन
डीसी (एजेंसी)। अमेरिका के राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान
के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर
की मांग की है। ईरान की नई लीडरशिप
पहले के मुकाबले कम कट्टर और ज्यादा
समझदार है। हालांकि, ट्रम्प ने साफ
किया कि अमेरिका तुरंत सीजफायर नहीं
करेगा। उन्होंने कहा कि जब तक होर्मुज
स्ट्रेट पूरी सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक
अमेरिका अपना मिलिट्री ऑपरेशन जारी
रखेगा।
वहीं मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव
के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर
सामने आई है। UAE से LPG (रसोई
गैस) लेकर आए दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट
पार करके सुरक्षित रूप से भारत पहुंच
गए हैं। पहला टैंकर BW TYR 31 मार्च
को मुंबई पहुंचा। यह जहाज UAE के रास
अल खैमाह से चला था और करीब 6 दिन
में भारत पहुंचा। दूसरा टैंकर BW ELM 1
अप्रैल को न्यू मैंगलोर के पास पहुंचा। इन
दोनों जहाजों में करीब 94,000 टन LPG
और 50 से ज्यादा भारतीय नाविक भी
मौजूद थे। सरकार के मुताबिक, अब तक
8 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज
स्ट्रेट पार कर चुके हैं।
वहीं ईरान की सेना इस्लामिक
रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने
कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उनके
कंट्रोल में है। अमेरिका चाहे जो कहे, यह
रास्ता उनके दुश्मनों के लिए नहीं खोला
जाएगा।
ईरान के पूर्वविदेश मंत्री जावेद जरीफ
ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है। उन्होंने
कहा कि दूसरे देशों की सेना पर भरोसा
करके सुरक्षा नहीं मिल सकती।
उन्होंने
कहा कि विदेशी सैन्य ठिकाने असल में
“यद्धु शुरू होने कीजगह” बन जाते हैं। ट्रम्प
कुछ समय बाद चले जाएंगे, लेकिन ईरान
हमेशा रहेगा। इसलिए सभी को मिलकर
सुरक्षा बनानीचाहिए। इंटरनेशनल एनर्जी
एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है
कि इस युद्ध की वजह से हर दिन लगभग
1.2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई कम हो
गई है। उन्होंने कहा कि अप्रैल में स्थिति
और खराब हो सकती है और इसका
असर जल्द ही यूरोप में भी दिखेगा। अभी
सबसे ज्यादा कमीजेट फ्यूल और डीजल
की हो रही है। पहले इसका असर एशिया
में दिख रहा है। वहीं ईरान में सरकार और
धार्मिक सेना (IRGC) के बीच टकराव
बढ़ने की खबर है। तेहरान टाइम्स रिपोर्ट
के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना
जैसी संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड
कॉर्प्स (IRGC) और राष्ट्रपति मसूद
पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर
खींचतान चल रही है।
अखबार के मुताबिक IRGC ने देश
का कंट्रोल अब अपने हाथ में ले लिया है।
दावा यह भी है कि राष्ट्रपति पजशकियान
की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा
खामेनेई से नहीं हो पा रही है। दरअसल
इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बड़ा
दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका
और ईरान के बीचचल रहे संघर्ष को खत्म
करने के लिए बातचीत जारी है। ट्रम्प के
मुताबिक, उनकी टीम कुछ ‘समझदार’
ईरानी नेताओं के संपर्क में है और बातचीत
के जरिए हालात को शांत करने की
कोशिश की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि इस सप्ताह
उनका देश 35 देशों की एक अहम बैठक
की मेजबानी करेगा। इस बैठक का
मकसद होर्मुज को फिर से खोलने पर
चर्चा करना है।
इस बैठक में दुनिया के कई बड़े देश
शामिल होंगे और इसका मकसद इस बेहद
महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते की सुरक्षा और
भविष्य को लेकर समाधान निकालना है।
कतर जैसे देश ने भी इस मुद्दे पर चर्चा
में दिलचस्पी दिखाई है। भारत की इस
बैठक में भागीदारी अभी तय नहीं हुई है,
लेकिन संभावना जताई जा रही है कि
भारत इसमें शामिल हो सकता है।
इसकी वजह यह है कि भारत अपनी
ऊर्जाजरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी
निर्भर है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय
भी रहते हैं।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा
समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने
कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, लेकिन
अमेरिका के लिए नहीं। अब 47 साल की
मेहमाननवाजी खत्म हो चुकी है।
अजीजी ने कहा कि यह रास्ता सिर्फ
उन देशों के लिए खुला रहेगा, जो ईरान के
बनाए नए नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने
तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प ने “रेजीम
चेंज” का सपना पूरा कर लिया है, लेकिन
यह जमीन पर नहीं बल्कि समुद्र के नियमों
में हुआ है।