राजकरण

स्पीकर ओम बिरला को हटाने का विपक्ष का प्रस्ताव खारिज

स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

 लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया है। इस दौरान विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया, वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने इससे पहले विपक्ष पर करारा हमला भी बोला। पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने का फैसला सुनाया। लोक सभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान, वोटिंग और इसके ध्वनिमत से खारिज होने के बाद पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने सदन की कार्यावाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। गृहमंत्री अमित शाह के संबोधन के दौरान विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया।

इस दौरान प्रदर्शन कर रहे विपक्षी सदस्यों ने गृहमंत्री अमित शाह से माफी की मांग की। आप सच्चाई नहीं सुनना चाहते- पीठासीन अध्यक्ष विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा में पीठासीन अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को बैठने के लिए कहा और उनके न मानने पर उन्होंने कहा कि आप सच्चाई नहीं सुनना चाहते हैं। विपक्ष के हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने कहा- डोकलाम विवाद के दौरान कांग्रेस के नेता चीन गए, चीनी दूतावास में कांग्रेस गुप्त मीटिंग कर रही थी, कांग्रेस ने ही चीन को अक्साई चिन को दे दिया।

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि सभी सदस्यों की अनुमति हो तो सदन की कार्यावाही गृहमंत्री का भाषण पूरा होने तक बढ़ा दिया जाए। इस दौरान विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया और आरोप लगाया कि गृहमंत्री ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। इस पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मेरे भाषण में कोई भी असंसदीय शब्द हो तो उसे डिलीट कर दिया जाए। इस पर पीठासीन अध्यक्ष ने भी फैसला सुनाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि तमाम अहम मुद्दों पर बोलते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता की उपस्थिति मात्र 51 फीसदी रही है। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के विदेश यात्राओं का भी जिक्र किया है, उन्होंने कहा जब-जब बजट सत्रया महत्वपूर्ण सत्र आता है तो वे विदेश में होते हैं। कई अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान वे सदन से गायब रहते हैं।