राजकरण

पश्चिम एशिया संकट पर संसद में चर्चा की संभावना कम,विपक्ष का वॉकआउट

भारत ने सभी से संयम बरतने की अपील की थी- जयशंकर

 संसद के बजट सत्र के दौरान पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर फिलहाल संसद में विस्तृत चर्चा होने की संभावना कम बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक संसदीय नियमों के अनुसार यदिकिसी मंत्री ने किसी महत्वपूर्ण और तात्कालिक विषय पर स्वयं से दिया गया बयान दे दिया है, तो उस पर अलग से चर्चा कराने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं होता। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर सरकार का पक्ष रख चुके हैं। उन्होंने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित मंत्रालय स्थिति के अनुसार जरूरी कदमों के लिए समन्वय कर रहे हैं।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को ही बयान जारी कर क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने दोहराया कि भारत का मानना है कि हालात को शांत करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे बेहतररास्ता है। भारत ने युद्ध को लेकर जताई थी चिंता- जयशंकर विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि 28 फरवरी 2026 को भारत ने आधिकारिक तौर पर इस युद्ध को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार बढ़ती हिंसा, लोगों की मौत और ईरान के नेतृत्व तंत्र के ढहने जैसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तनाव कम करने के लिए आगे आना चाहिए।

‘सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब भी देना चाहिए’ कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अगर मंत्री केवल बयान दें और उस पर कोई चर्चा या सवाल की अनुमति न हो, तो ऐसे बयान का कोई मतलब नहीं रह जाता। वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यदि सरकार संसद में बयान देने आती है तो उसे विपक्ष के सवालों का जवाब भी देना चाहिए। सवालों की अनुमति न मिलने के कारण ही विपक्ष ने वॉकआउट का फैसला लिया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘हमारे कांग्रेस सहयोगियों द्वारा पेश किया जाने वाला प्रस्ताव आज लोकसभा में सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, पिछले 13 दिनों से पश्चिम एशिया और बृहत्तर मध्य पूर्व में स्थिति बिगड़ती जा रही है। भारत का एक विशाल प्रवासी समुदाय है, खाड़ी देशों और बृहत्तर मध्य पूर्व में चार करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। बिगड़ती स्थिति के कारण वे ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वे भारत की रणनीतिक अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंतित हैं।