‘कैश कांड’
मामले में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को
पद से हटाने के लिए संसद में चल रही
कार्यवाही से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
ने सुनवाई पूरी कर ली है और अब फैसला
सुरक्षित कर लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने
सोमवार को दोनों पक्षों को लिखित जवाब
दाखिल करने को कहा।
इसके साथ ही
जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर
द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी के
सामने पेश होने की समय सीमा बढ़ाने
की भी मांग की थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट
ने उनकी यह मांग ठुकरा दी। जस्टिस
वर्मा को अब तय तारीख 12 जनवरी
को ही कमेटी के सामने पेश होना होगा
और कमेटी के सामने अपनी बात रखनी
होगी।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट
में याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने
लोकसभा स्पीकर की ओर से बनाई गई
तीन सदस्यीय समिति को चुनौती दी।
उनका कहना था कि जजेज इन्क्वायरी
एक्ट के तहत किसी जज को हटाने की
प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है जब दोनों
सदन, यानी लोकसभा और राज्यसभा,
प्रस्ताव को स्वीकार करें और उसके बाद
एक संयुक्त समिति बनाई जाए। लेकिन
इस मामले में सिर्फ लोकसभा ने प्रस्ताव
पारित किया है, जबकि राज्यसभा में यह
अभी लंबित है।
इसलिए सिर्फ लोकसभा
स्पीकर द्वारा समिति बनाना कानून के
खिलाफ है।
जस्टिस वर्मा का यह भी कहना था कि
21 जुलाई को जब उनके खिलाफ प्रस्ताव
पेश किया गया था, तब आगे की जांच के
लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति बननी
चाहिए थी। केवल लोकसभा की तरफ से
समिति बनाना प्रक्रिया में गड़बड़ी है।
गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा के
दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में 14-15
मार्च 2025 की रात आग लग गई थी।
आग बुझाने के दौरान फायर सर्विस को
स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां
मिलीं, जिनके वीडियो भी वायरल हुए।
उस वक्त जस्टिस वर्मा बंगले में मौजूद
नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस और
फायर ब्रिगेड को सूचना दी। जांच में यह
कैश अनएकाउंटेड बताया गया।
इस घटना के एक हफ्ते बाद जस्टिस
वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद
हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया, जहां
फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं
सौंपा गया है।