उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा
है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली
इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच
नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति
और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त
उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट,
टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के
समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध
परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को
आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति उस
प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी
नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात
के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष
2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती
दी गई।
उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस
और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त
बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं
और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान
को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने
कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म
नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है,
जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति
से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों
की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम
से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और
लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य
सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ
स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की
अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में
‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन
गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू
हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों
के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और
जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही
मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय
स्वरूप के रूप में विकसित हुआ।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का
उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि
इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़
रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति
मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं
की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की
जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों
का समाधान किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा
कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-
चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश
के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में
उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का
सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों
में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की
पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और
रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से
आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका
रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर
प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की
लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं
का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है।
इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128
परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी
होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11
लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं
निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर
हैं।
सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और
समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी
प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का
समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय
समय में धरातल पर उतर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के
माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं
का प्रभावी समाधान हुआ है।
राजस्व,
वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास,
पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग
एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय
ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और
टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई
है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के
तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान
किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत
है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278
परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित
किया गया है, जिसकी समाधान दर 97
प्रतिशत है।