रक्षा मंत्रालय की
एक अहम बैठक में मल्टी-रोल फाइटर
एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद के प्रस्ताव
को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही
भारतीय वायुसेना को 114 नए राफेल
लड़ाकू विमान मिलने का रास्ता साफ
हो गया है। राफेल विमान का यह सौदा
फ्रांस के साथ होना है। इस बैठक में करीब
3.60 लाख करोड़ रुपए के रक्षा खरीद
प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई है। इस फैसले
से तीनों सेनाओं की लड़ाकू क्षमता और
तैयारियों में बड़ा इजाफा होगा। नई दिल्ली
में गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन
काउंसिल (डीएसी) की यह बेहद
महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में वायुसेना के लिए राफेल फाइटर
एयरक्राफ्ट, आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलों
व हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट
खरीदने को मंजूरी दी गई है। थलसेना
के लिए एंटी-टैंक माइन और टी-72
टैंक और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के
ओवरहॉल को स्वीकृति दी गई है। वहीं,
नौसेना को लंबी दूरी के समुद्री निगरानी
विमान मिलेंगे। नई दिल्ली में हुई इस बैठक
में भारतीय वायुसेना के लिए मल्टी-रोल
फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद को
मंजूरी दी गई है।
बता दें कि बीते वर्ष ऑपरेशन सिंदूर
के दौरान राफेल की मदद से पाकिस्तान
में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना
बनाया गया था। दरअसल, राफेल जैसे
लड़ाकू विमान वायुसेना को दुश्मन पर
लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की
ताकत देंगे। रक्षा मंत्रालय का कहना
है कि अच्छी बात यह है कि ज्यादातर
विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलें और
एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो
सैटेलाइट खरीदने के लिए भी मंजूरी मिली
है। ये नई मिसाइलें दुश्मन के ठिकानों पर
दूर से ही सटीक वार करने में मदद करेंगी।
एएस-एचएपीएस सैटेलाइट सिस्टम
लगातार निगरानी, खुफिया जानकारी
जुटाने और सैन्य संचार को मजबूत करने
में काम आएगा।
भारतीय थलसेना के लिए भी कई
महत्वपूर्ण हथियारों को मंजूरी दी गई है।
एंटी-टैंक माइन ‘विभव’ और टी-72
टैंक, इन्फैंट्री युद्धक वाहन बीएमपी-
II और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के
ओवरहॉल को मंजूरी मिली है।
गौरतलब है कि ‘विभव’ माइंस
दुश्मन के टैंकों और भारी गाड़ियों की
रफ्तार रोकने में कारगर होंगी। वहीं,
टैंकों और सैन्य वाहनों को अपग्रेड करने
से उनकी उम्र और क्षमता दोनों बढ़ेंगी।
भारतीय नौसेना के लिए 4 मेगावॉट
मरीन गैस टरबाइन आधारित इलेक्ट्रिक
पावर जेनरेटर को मंजूरी दी गई है। इसके
अलावा लंबी दूरी के समुद्री निगरानी
विमान पी 8आई खरीदने को मंजूरी दी
गई है। ये पी 8आई विमान पनडुब्बी रोधी
अभियानों, समुद्री निगरानी और लंबी दूरी
की स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत करेंगे।
वहीं, पावर जेनरेटर भारत में ही
‘मेक-1’ कैटेगरी के तहत विकसित
होंगे, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।
इसके अलावा, भारतीय तटरक्षक बल
के डॉर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-
ऑप्टिकल इन्फ्रारेड सिस्टम खरीदे
जाएंगे। इससे समुद्री निगरानी और ज्यादा
प्रभावी होगी। रक्षा मंत्रालय का मानना है
कि ये फैसले भारत की रक्षा तैयारियों को
नई मजबूती देंगे और आत्मनिर्भर भारत
की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे।
वहीं भारतीय समुद्री क्षेत्र दुनिया के
लिए बेहद अहम है। इसी इलाके से होकर
दुनिया का 70-80 फीसदी ट्रेड गुजरता
है। ऐसे में व्यापार और भारत की सुरक्षा
के हितों को देखते हुए भारतीय नौसेना
लगातार अपने बेड़े में नए जंगी जहाज
और एयरक्राफ्ट शामिल कर रही है।
उसी कड़ी में लंबी दूरी तक टोह करने
वाले पी-8आई विमानों की अतिरिक्त
खरीद को रक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में
गुरुवार को हुई रक्षा अधिकरण परिषद
की बैठक में नेवी के लिए 6 अतिरिक्त
पी-8आई के एओएन यानी एक्सेप्टेंस
ऑफ नेसेसिटी को मंजूरी दे दी है। रक्षा
मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा
गया कि पी-8आई विमानों की खरीद से
नौसेना की लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी
युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री
हमले की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
होगी। यह खरीद अमेरिका से की जाएगी।
भारतीय नौसेना में पी-8आई पहले से
ही शामिल है। भारतीय नौसेना के लिए
सरकार ने अमेरिका से अब तक कुल 12
पी-8आई विमान खरीदे हैं। पहले चरण में
साल 2009 में 8 और दूसरे चरण में साल
2016 में 4 पी-8आई विमान लिए गए।