पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान काटे गए वोटों के
मुकाबले विधानसभा सीटों में जीत के कम अंतर को लेकर सुप्रीम
कोर्ट में नई याचिकाएं दाखिल की जा सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य लोगों
को इस संबंध में नई याचिकाएं दायर करने की अनुमति दे दी है।
यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने सोमवार को दिया,
जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या
बागची शामिल थे।
यह मामला तब सामने आया जब वरिष्ठ अधिवक्ता और
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने अदालत
में यह दलील दी कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का
अंतर, मतदाता सूची से हटाई गई वोटों की संख्या से कम रहा।
इस मामले में चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष
अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसे दावों के लिए चुनाव याचिका ही
एकमात्र उचित माध्यम है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह
एसआईआर से संबंधित मुद्दों और वोट जोड़ने या हटाने के खिलाफ
होने वाली अपीलों के लिए जवाबदेह हो सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने इन दलीलों पर ध्यान देते हुए
याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान करते हुए नई याचिकाएं दायर करने
का अवसर दिया। यह निर्णय चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और
निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना
जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों
में भारतीयजनता पार्टी (भाजपा) ने 294 सदस्यीय विधानसभा में
207 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 80 सीटों
पर जीत हासिल की।
इन चुनावों में प्रदेश में 90 प्रतिशत से अधिक
का रिकॉर्ड मतदान दर्जकिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ
विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें ममता बनर्जी
द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी, जो राज्य में मतदाता सूची के
एसआईआर से जुड़ी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के
मालदा जिले में एक अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रीय जांच
एजेंसी (एनआईए) को दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने
का निर्देश दिया है।