वारदात

ईरान में बिगड़े हालात, भारतीयों को निकालने की सलाह

‘ईरान को तुरंत छोड़ दें, जरूरी कागजात साथ रखें’, िवदेश मंत्रालय की भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी

ईरान में हिंसक प्रदर्शन की वजह से भारत सरकार ने बुधवार को नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय नागरिक, चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, व्यापारी हों या पर्यटक, इस समय ईरान में हैं, उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकल जाना चाहिए। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि यह सलाह 5 जनवरी की पिछली एडवाइजरी के आगे की कड़ी है और ईरान की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है।

ईरान में पिछले दो सप्ताह के अधिक समय से जारी हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारत सरकार ने ईरान में बदलती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है। ईरान में ये विरोध प्रदर्शन पिछले महीने के आखिर में तब शुरू हुए थे, जब ईरानी मुद्रा रियाल रिकॉर्डनिचले स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद ये आंदोलन धीरे-धीरे देश के सभी 31 प्रांतों में फैल गया। शुरुआत में आर्थिक मुद्दों को लेकर शुरू हुए ये प्रदर्शन अब राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुके हैं।

उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की अपील विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी में कहा है कि भारतीय नागरिक उपलब्ध सभी परिवहन साधनों का उपयोग करें, जिनमें कमर्शियल उड़ाने भी शामिल हैं, ताकि वे सुरक्षित रूप से ईरान से बाहर निकल सकें। सतर्क रहने और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह सरकार ने दोहराया है कि ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ पूरी सतर्कता बरतें। उन्हें किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन या अशांत क्षेत्रों से दूर रहने, स्थानीय हालात पर नजर बनाए रखने और ईरान स्थित भारतीय दूतावास के नियमित संपर्क में रहने की सलाह दी गई है।

ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से कहा गया है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन से जुड़ेदस्तावेज, जैसे पासपोर्ट और पहचान पत्र, हर समय अपने पास सुरक्षित और तैयार रखें। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की सहायता या जानकारी के लिए भारतीय नागरिक तेहरान स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर सकते हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले 5 जनवरी को जारी एडवाइजरी में भी भारत सरकार ने अपने नागरिकों से ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने का आग्रह किया था।

साथ ही ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के व्यक्तियों को पूरी सावधानी बरतने और विरोध-प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई थी। ईरान के प्रधान न्यायाधीश ने सरकार विरोधी राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और फांसी की सजा का संकेत दिया है। वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कहा कि मृतकों की संख्या बढ़कर 2,572 हो गई है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि बुधवार सुबह तक मृतकों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई थी।

यह आंकड़ा दशकों में ईरान में हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं अधिक है और देश की 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है। मृतकों की संख्या की जानकारी मिलने के बाद, ट्रंप ने ईरान के नेताओं को चेतावनी दी कि वह किसी भी प्रकार की बातचीत समाप्त कर रहे हैं और ‘‘कार्रवाई करेंगे।’ ईरान में बुधवार शाम 300 शवों को दफनाया जाएगा। अंग्रेजी अखबार द गार्डियन के मुताबिक, शवों में प्रदर्शनकारियों के साथ सुरक्षा बलों के शव भी शामिल होंगे। ये कार्यक्रम कड़ी सुरक्षा के बीच तेहरान यूनिवर्सिटी के कैंपस में हो सकता है।

प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अब तक 2,550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकार से जुड़े लोग शामिल हैं। हालांकि ईरान से जुड़े मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं।

दावा- अरब देशों कीट्रम्प से ईरान पर हमला न करने की अपील इजराइल और कुछ अरब देशों के अधिकारियों ने अमेरिका से कहा है कि वह फिलहाल ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला न करे। एनबीसी न्यूज के मुताबिक, इन अधिकारियों का मानना है कि ईरान की सरकार अभी इतनी कमजोर नहीं हुई है कि अमेरिकी हमले से उसका खात्मा हो सके। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या के मामले में अमेरिका को क्या कदम उठाना चाहिए, इस पर उन्होंने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन के पक्ष में हैं और इस मामले में अमेरिका की कोशिशों का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें डर है कि सिर्फ विदेशी सैन्य कार्रवाई से यह टारगेट पूरा नहीं होगा। उनका मानना है कि इससे ईरान की सरकार गिरने के बजाय हालात और जटिल हो सकते हैं। इजराइल ने अमेरिका को सुझाव दिया कि वह सैन्य हमले के बजाय ऐसे कदमों पर ध्यान दे, जिनसे ईरान की सरकार अंदर से कमजोर हो।

इसमें ईरान के लोगों को कम्युनिकेशन ब्लैक आउट से निपटने में मदद देना, आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करना, साइबर हमले करना या ईरान के बड़े अधिकारियों पर सीमित हमले करना शामिल है, ताकि सरकार पर दबाव बढ़े। रिपोर्ट में एक अरब अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस समय अमेरिका के नेतृत्व में ईरान पर हमले को लेकर पड़ोसी देशों में ज्यादा समर्थन नहीं है।