रंगों का त्योहार
4 मार्च को है, जिसे लेकर देशभर में रंगों,
मिष्ठान, नए कपड़ों और उल्लास के साथ
होली की तैयारी चल रही है। खुशियों से
भरा त्योहार होली सिर्फ रंग खेलने का
मौका नहीं बल्कि बसंत के आगमन, बुराई
पर अच्छाई की जीत और प्रेम-भाईचारे
का प्रतीक भी है। होली पूरे देश में अलगअलग नाम और अनोखे अंदाज के साथ
मनाई जाती है। विविधताओं से भरे भारत
में होली के अलग-अलग नाम और
अंदाज होने के बावजूद मकसद केवल
रंगों के साथ दिलों को जोड़ना, पुरानी
कटुता भुलाना और प्रेम व सौहार्द को
बढ़ाना है। यूपी के ब्रज क्षेत्र में होली सबसे
पारंपरिक और जीवंत रूप में मनाई जाती
है। यहां होली का उत्सव फगुआ दूज
से शुरू होकर कई दिनों तक चलता है।
बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली
बहुत प्रसिद्ध है। लोककथा के अनुसार,
श्रीकृष्ण राधाजी के गांव बरसाना होली
खेलने आए थे।
आज भी महिलाएं हंसी-
मजाक में पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं
और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं।
वहीं, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर
में फूलों की होली खेली जाती है। भक्त
फूलों की पंखुड़ियां बरसाते हैं। बरसाना
के श्रीजी मंदिर में लड्डू होली की परंपरा है,
जहां रंग लगाने से पहले लड्डुओं की वर्षा
होती है। ब्रज में होली 40 दिनों तक कई
रूपों में मनाई जाती है।
कृष्णनगरी के बाद शिवनगरी काशी
में मसान होली की परंपरा है। वाराणसी
में होली को मसान होली के नाम से जाना
जाता है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ
अपने भक्तों और गणों के साथ मसान में
भस्म से होली खेलते हैं।
हरियाणा में होली को धुलंडी कहते हैं।
यहां ननद-भाभी की चुटीली नोकझोंक
और पारिवारिक हंसी-मजाक मुख्य
आकर्षण होता है।
महाराष्ट्र में होली रंग पंचमी तक
चलती है। मुख्य होली के पांचवें दिन रंग
खेलने की खास परंपरा है।
वहीं, गोवा में
शिग्मो के नाम से मनाई जाती है, जिसमें
भव्य झांकियां, जुलूस और लोकनृत्य होते
हैं। राज्य के लोग एक-दूसरे को बधाई
देते हुए पकवान खाते हैं। वहीं, गुजरात
में पहले होलिका दहन और अगले दिन
धुलेटी मनाई जाती है।
केरल के कोंकणी समुदाय में इसे
मंजल कुली या उकुली कहते हैं, जहां
रंगों की जगह हल्दी वाला पानी इस्तेमाल
होता है। अन्य राज्यों में भी अलग-अलग
नामों और खास अंदाज में जश्न मनाने की
परंपरा रही है। ओडिशा में डोला पूर्णिमा,
बिहार-झारखंड में फगुआ या फगुवा,
असम में फाकुवा या दौल और मणिपुर में
याओसांग के रूप में मनाया जाता है, जो
छह दिनों तक चलता है।
पंजाब में सिख समुदाय का होला
मोहल्ला होली के आसपास होता है। इसमें
गतका, तलवारबाजी और घुड़सवारी
जैसे शौर्य प्रदर्शन होते हैं। उत्तराखंड के
कुमाऊं में बैठकी होली और खड़ी होली
होती है। यहां रंग के साथ ही शास्त्रीय
रागों-लोकगीतों का गायन होता है।
हिमाचल प्रदेश में होली को फाग कहते हैं,
जहां लोकगीत और नृत्य के साथ उत्सव
मनाया जाता है। वहीं, पश्चिम बंगाल में
डोल जात्रा या बसंत उत्सव के रूप में
होली का पर्व मनाया जाता है।