दुनिया के केंद्रीय बैंकों के पास अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से ज्यादा हुआ सोना, डॉलर पर बढ़ी चिंता
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं और अब उनके पास अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की तुलना में अधिक सोना हो गया है। यह दावा निवेश बैंक जेफरीज (Jefferies) की एक नई रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह रुझान निवेशकों और केंद्रीय बैंकों के डॉलर से धीरे-धीरे दूरी बनाने और सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में प्राथमिकता देने का संकेत देता है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब निवेशक अमेरिकी सरकार की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जता रहे हैं। जेफरीज के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के पास अब अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की तुलना में अधिक सोना मौजूद है। यह अमेरिका की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज के बोझ और अमेरिकी डॉलर के दीर्घकालिक भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।
जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रेटजी प्रमुख क्रिस्टोफर वुड ने अपनी नई रिपोर्ट ‘ग्रीड एंड फियर’ में कहा है कि सोने की कीमतों पर अल्पकालिक दबाव बढ़ते बॉन्ड यील्ड और सख्त मौद्रिक नीति की संभावनाओं के कारण आ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक स्तर पर सोने की मजबूत स्थिति बनी हुई है।
अमेरिका पर बढ़ता कर्ज और ब्याज का बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसके कारण ब्याज भुगतान का बोझ भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका का वार्षिक शुद्ध ब्याज भुगतान बढ़कर 1.03 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जो संघीय सरकार की कुल प्राप्तियों का लगभग 19 प्रतिशत है। वहीं ब्याज भुगतान और सरकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च अब कुल सरकारी राजस्व का 93 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ले रहा है।
अमेरिकी बॉन्ड से घट रहा विदेशी निवेश
केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद में तेजी रिजर्व प्रबंधन में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है। कई देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का भंडार बढ़ाया है। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों का जोखिम और फिएट मुद्राओं को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी सोने की मांग को मजबूत किया है।
इस बीच अमेरिकी सरकारी कर्ज की विदेशी मांग में भी कमजोरी देखने को मिली है। जेफरीज के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने मार्च महीने में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी 138.4 अरब डॉलर घटा दी, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व किन देशों के पास?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 2026 की पहली तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 8,134 टन सोने के भंडार के साथ दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है। इसके बाद जर्मनी के पास 3,350 टन, इटली के पास 2,452 टन और फ्रांस के पास 2,437 टन सोने का भंडार है।
रूस और चीन दोनों के पास 2,300 टन से अधिक सोना मौजूद है। वहीं भारत लगभग 880 टन सोने के भंडार के साथ वैश्विक स्तर पर आठवें स्थान पर है। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत है। स्विट्जरलैंड, जापान और नीदरलैंड भी शीर्ष-10 देशों की सूची में शामिल हैं।
वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बदलाव के संकेत
जेफरीज का मानना है कि केंद्रीय बैंक हालिया गिरावट के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की तुलना में सोने को अधिक महत्व दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में एक बड़ा और गहरा बदलाव शुरू हो चुका है। हालांकि अमेरिकी डॉलर अभी भी दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा बना हुआ है, लेकिन केंद्रीय बैंक मूल्य के सुरक्षित भंडार के रूप में तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं।