अवस्थापना
एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य
सचिव आलोक कुमार ने औद्योगिक गलियारे
का जिलाधिकारी डा. वीके सिंह, उपायुक्त
उद्योग अमरेश पांडेय और अन्य अधिकारियों
के साथ निरीक्षण किया। इस दौरान अपर
मुख्य सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश
दिए कि वह एक माह में अपना पूरा प्रारूप
तैयार लें और विदेशी कंपनियों को जमीन पर
कब्जा दें। ताकि कंपनियां अपना कारोबार
करने की आगे की तैयारी कर सके। सर्किट
हाउस में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव ने
अधिकारियों को निर्देश दिए कि औद्योगिक
गलियारे (Industrial corridor) का
विकास करने में कोई भी लापरवाही नहीं होनी
चाहिए।
डीएम को निर्देशदिए किवह निगरानी
के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करें।
गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga
Expressway) के निर्माण के बाद अब
इसके किनारे सभी जनपदों में औद्योगिक
गलियारे की स्थापित होंगे। सभी जगह जमीन
खरीदी जा रही है। संभल और मेरठ में पहले
चरण का विकास कार्य भी शुरू कर दिया गया
है। मेरठ में सरकार की औद्योगिक गलियारा
के दूसरे और तीसरेचरण की स्थापना की भी
तैयारी है, लेकिन दूसरेचरण के लिए 292
हेक्टेयर भूमि का क्रय प्रस्ताव तहसील द्वारा
डेढ़ साल में भी तैयार नहीं किया जा सका है।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग
के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने
रविवार को यहां का निरीक्षण करते समय
कार्यदायी संस्था ब्लैक सीड इंफ्राटेक प्राइवेट
लिमिटेड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि
वह जमीन का जल्द भराव करके और यहां पर
आधुनिक सड़कें बनाकर विदेश कंपनियों को
कब्जा दें, ताकिवह अपना आगे का कार्य पूर्ण
कर सके। बता दें कि औद्योगिक गलियारे के
लिए 12 विदेशी कंपनियों ने अपनी सहमति दी
हुई है। बता दें कि कार्यदायी संस्था को अभी
जमीन का भराव करके सड़कें बनानी है। अभी
भराव का कार्यचल रहा है।
औद्योगिक गलियारे के तीनों चरणों
की समीक्षा की
अपर मुख्य सचिव नेशाहजहांपुर, संभल
के बाद मेरठ में औद्योगिक गलियारा का
निरीक्षण किया। मेरठ में सरकार ने पहलेचरण
में 214 हेक्टेयर जमीन में से अधिकांश की
खरीद कर ली है। लगभग 20 हेक्टेयर जमीन
विवाद के चलत अे धिग्रहण प्रक्रिया के माध्यम
स ली जा रही है। प्रथम े चरण की भूमि में यूपीडा
नेविकास कार्य भी शुरू कर दिए हैं।
दूसरेचरण में तीन गांवों की 292 हेक्टेयर
भूमि को चिह्नित करके उसकी खरीद की
घोषणा की जा चुकी है।
किसान विरोध कर
रहे हैं लिहाजा इस जमीन पर स्थापित किसानों
की परिसंपत्तियों का सर्वे नहीं हुआ। यूपीडा ने
जमीन का क्रय प्रस्ताव मांगा लेकिन पिछले
डेढ़ साल से अधिक समय से यह प्रस्ताव
तहसील में ही लंबित है।
तीसरेचरण के लिए यूपीडा ने लगभग
300 हेक्टेयर जमीन चिह्नित करके उसका
प्रस्ताव जिला प्रशासन से मांगा था। इसे भी
पांच महीने का समय बीत गया है। रविवार को
आए अपर मुख्य सचिव ने सभी बिंदुओं पर
विस्तार सेचर्चा की। उन्होंनेनिर्देश दिए कि
जल्द तीनों चरणों पर काम पूरा किया जाए।