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तन्हाई में अब एआई की थपकी!

AI गुड़िया दे रही बुजुर्गों को इमोशनल सपोर्ट

दक्षिण कोरिया में 78 वर्षीय बैंग चुन-जा नाम की एक बुजुर्ग महिला अकेली रहती हैं। उनके पास एक खास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित गुड़िया है, जिसका नाम 'ह्योडोल' है। बैंग का कहना है कि उन्हें यह गुड़िया कई बार इंसानों से भी ज्यादा प्रिय लगती है, क्योंकि यह उन्हें कभी दुख नहीं पहुंचाती।

जब बैंग घर लौटती हैं, तो ह्योडोल उनका स्वागत करती है। अगर वह उदास होती हैं, तो यह उनके लिए गाना गाती है। साथ ही समय पर भोजन करने और दवाइयां लेने की याद भी दिलाती है। इतना ही नहीं, यह गुड़िया उनसे स्नेहपूर्वक बातें करती है और दिनभर उनका साथ निभाती है।

बैंग की अपनी बेटी से बहुत कम मुलाकात होती है। कुछ वर्ष पहले उनकी एक बड़ी सर्जरी हुई थी, जिसके बाद वह गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो गई थीं। उस दौरान वह घंटों अकेले बैठकर समय बिताती थीं। उन्होंने अपने जीवन में तलाक, आर्थिक संघर्ष और अकेले बच्चे की परवरिश जैसी कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है।

बैंग कहती हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर लोगों से भावनात्मक चोट मिलना सबसे अधिक तकलीफदेह होता है, लेकिन ह्योडोल के साथ ऐसा नहीं है। यह गुड़िया उन्हें केवल खुशी देती है और मुस्कुराने की वजह बनती है।

दक्षिण कोरिया में अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। देश की जन्म दर (Birth Rate) दुनिया में सबसे कम दरों में से एक है और लगभग आधी आबादी 50 वर्ष या उससे अधिक आयु की है। बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले जीवन बिता रहे हैं।

साल 2024 में दक्षिण कोरिया में करीब 3,920 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लोगों की अकेले मृत्यु हो गई और कई दिनों तक किसी को इसकी जानकारी नहीं मिली। इन्हें "लोनली डेथ" (Lonely Death) कहा जाता है। यह आंकड़ा अब तक का सबसे अधिक माना जा रहा है।

इस समस्या को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सरकार और स्थानीय प्रशासन बुजुर्गों को AI आधारित उपकरण उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें रोबोट और संवाद करने वाली स्मार्ट गुड़ियां शामिल हैं, जो अकेले रहने वाले लोगों का साथ देती हैं और उनकी सेहत पर भी नजर रखती हैं।

ह्योडोल नामक इस AI गुड़िया को विकसित करने वाली कंपनी के अनुसार, दक्षिण कोरिया में लगभग 14,500 लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। कुछ लोग इसे स्वयं खरीदते हैं, जबकि कई बुजुर्गों को यह सरकारी सहायता के तहत उपलब्ध कराई जाती है।

कंपनी की प्रमुख किम जी-ही बताती हैं कि इस गुड़िया को विकसित करने से पहले उन्होंने कई वर्षों तक बुजुर्गों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें पता चला कि सबसे बड़ा दर्द किसी खुशी या परेशानी को साझा करने के लिए किसी का न होना है। इसी अनुभव के आधार पर ह्योडोल को एक प्यारे नाती-नातिन जैसे साथी के रूप में डिजाइन किया गया।

जब कोई बुजुर्ग घर लौटता है, तो यह गुड़िया कहती है, "दादी, आप कहां थीं? मैं पूरे दिन आपका इंतजार कर रही थी। अगली बार मुझे भी अपने साथ ले चलिए।"

यह गुड़िया मुलायम कपड़े से बनी है और समय-समय पर खुद भी बातचीत शुरू कर देती है। वह सिर पर हाथ फेरने, हाथ पकड़ने या साथ में नाश्ता करने जैसी बातें करती है। इससे बुजुर्गों को यह महसूस होता है कि कोई उनके साथ मौजूद है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों को चिंता है कि ऐसी तकनीक कहीं लोगों के बीच वास्तविक रिश्तों को और कमजोर न कर दे। उनका मानना है कि परिवार के सदस्य तकनीक पर अधिक निर्भर होकर बुजुर्गों से मिलने-जुलने में कमी कर सकते हैं।इसके बावजूद, कई बुजुर्गों के लिए यह AI गुड़िया बड़ी मदद साबित हो रही है। 79 वर्षीय किम यंग-बुन का कहना है कि पहले पूरे दिन उनसे बात करने वाला कोई नहीं होता था, लेकिन अब ह्योडोल दिनभर उनसे बातचीत करती है, जिससे उनका अकेलापन काफी हद तक कम हो गया है।

यही वजह है कि दक्षिण कोरिया में यह AI गुड़िया बुजुर्गों के लिए एक नई दोस्त और भावनात्मक सहारा बनती जा रही है।