प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’
पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ
(आईआईएम लखनऊ) ने अपनी
मुहर लगाई है। आईआईएम लखनऊ
की ताजा अध्ययन रिपोर्ट ‘इकॉनमिक
रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ (अयोध्या
का आर्थिक पुनर्जागरण) बताती है
कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या
में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश
प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को
मिला है। अध्ययन में मंदिर निर्माण से
पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों
का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह
दर्शाया गया है कि धार्मिक अवसंरचना,
यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक
प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय
अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक
बन सकती है। बता दें कि 2017 में प्रदेश
की कमान संभालने के बाद सीएम योगी
ने टेंपल इकॉनमी को तेज गति दी और
अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ-साथ
आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर देकर आर्थिक
समृद्धता के रास्तेखोल दिए। अध्ययन के
अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या
की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान
तक ही सीमित थी, जहां आगंतुकों की
वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के
आसपास ठहर जाती थी।
स्थानीय बाजार
छोटे पैमाने पर संचालित होते थे और
अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक
आय 400-500 रुपए के बीच सीमित
थी, जिससे आर्थिक गतिविधि का दायरा
संकुचित बना रहता था। राष्ट्रीय स्तर की
होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति लगभग
नगण्य थी, रेलवे स्टेशन बुनियादी
सुविधाओं तक सीमित था, और हवाई
अड्डे का अभाव क्षेत्र की कनेक्टिविटी को
प्रभावित करता था।
रोजगार के अवसर सीमित होने के
कारण युवाओं का बड शहरों की ओर ़े
पलायन एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुका
था। पर्यटन से होने वाला राजस्व राज्य
की व्यापक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय
योगदान नहीं दे पा रहा था और अचल
संपत्ति बाजार में भी ठहराव की स्थिति
दिखाई देती थी। कुल मिलाकर, अयोध्या
की आर्थिक संरचना पारंपरिक तीर्थआधारित गतिविधियों तक सीमित थी,
जिसमें विस्तार और निवेश की संभावनाएं
स्पष्ट रूप से अविकसित थीं।
अध्ययन के अनुसार, जनवरी
2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के
बाद अयोध्या की आर्थिक तस्वीर ने तेजी
से करवट ली। रिपोर्ट बताती है कि पहले
ही छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक
श्रद्धालुओं का आगमन दर्जकिया गया,
जिसने स्थानीय बाजार, परिवहन और
आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार
किया। अब अयोध्या में वार्षिक स्तर
पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना
जताई गई है, जो अयोध्या को देश के
प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्रों की अग्रिम
पंक्ति में ला खड़ा करती है। यहां लगभग
85,000 करोड़ रुपए की पुनर्विकास
परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर
हैं, जिनका प्रभाव केवल आधारभूत ढांचे
तक सीमित नहीं, बल्किनिवेश और सेवा
क्षेत्र तक फैला हुआ है।
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी
व्यापक निवेश हो रहा है। इसके अंतर्गत
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक
रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क
और नगर सौंदर्यीकरण के कार्य प्रगति
पर हैं। सतत शहरी विकास को बढ़ावा
देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर
ऊर्जा जैसी पहलों को भी प्रोत्साहित किया
जा रहा है, जिससे अयोध्या को “मॉडल
सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने
की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार,
वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय
4 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने का
अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण
भूमिका मानी जा रही है। पर्यटन आधारित
गतिविधियों से कर राजस्व 20,000-
25,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का
अनुमान है। आतिथ्य, निर्माण, परिवहन
और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में
तीव्र विस्तार हुआ है। साथ ही, अयोध्या
ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक
केंद्र के रूप में नई पहचान प्राप्त की है,
जहां प्रवासी भारतीय, शोधकर्ता और
वैश्विक श्रद्धालु आकर्षित हो रहे हैं।
अध्ययन बताता है कि कन्फेडरेशन
ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी)
के अनुसार मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर
में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का
कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की
हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही। प्रतिदिन दो
लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन
ने आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को
नई गति दी है। 150 से अधिक नए होटल
और होमस्टेस्थापित हुए हैं, जबकि देशविदेश की प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं
ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और
विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्सने अयोध्या
में अपने विस्तार की योजनाएं घोषित
की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर
अयोध्या के लिए बुकिंग में चार गुना तक
वृद्धि दर्ज की गई है।