राजकरण

अमेरिका-इजराइल का ईरान पर हमला

स्कूल पर मिसाइल गिरने से 40 छात्राओं की मौत, ईरान ने भी इजराइल-दुबई पर 400 मिसाइलें दागीं

इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला कर दिया। इरना न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों में दक्षिणी ईरान में 40 छात्राओं की मौत हो गई। जबकि 45 घायल हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान ने पलटवार करते हुए पांच देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। मीडिया रिपोर्टके मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिसाइलें दागीं हैं। ईरान ने इजराइल के अलावा कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी बेस पर भी हमला किया है।

ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई को भी निशाना बनाया है। दरअसल, इजराइल ने ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सुप्रीम लीडर खामेनेई का ऑफिस और ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन को निशाना बनाया। हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित जगह शिफ्टकर दिया गया है। अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए अभियान का नाम ‘लियोनस् रोर’ (शेर की दहाड़) रखा है। वहीं अल जजीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन है।

यह हमला ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर चल रही बातचीत के बीच हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद अमेरिका और उसके लोगों को खतरे से बचाना है। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्मकरने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। अमेरिकी सेना पहले ही ईरान को चारों तरफ से घेर चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजराइल छोड़ने के लिए कहा था। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है।

ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौताकरने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना हैकि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना हैकि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षाकी। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा हैकिमिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी।

यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता हैकि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। ईरान के हमले के बाद बहरीन की राजधानी मनामा के जुफैर इलाके में अमेरिकी नेवल बेस से घना काला धुआं उठता दिखाई दिया। यह वही जगह हैजहां अमेरिकी नौसेना की 5वीं फ्लीट और नेवल फोर्सेज सेंट्रल कमांड (NAVCENT) का मुख्यालय स्थित है। हमले के बाद सामने आए विजुअल्स में नेवल बेस परिसर के ऊपर काले धुएं के बड़े गुबार दिखाई दिए।

हालांकि नुकसान और हताहतों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। UAE के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने फिर से ईरान से आने वाली नई मिसाइलों को हवा में ही रोकदिया है। दुबई में कुछ जगहों पर धमाकों की आवाज सुनी गई। माना जा रहा हैकि ये आवाजें मिसाइलों को रोकते समय हुईं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अल-सलेम एयर बेस को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल स्टाफ सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी के अनुसार कुवैती वायु रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर दिया।

इंटरसेप्शन के दौरान मिसाइलों के टुकड़े और मलबा एयर बेस के आसपास गिरा। हालांकि इस हमले में किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं मिली है। पश्चिम एशिया संकट पर संयुक्त राष्ट्र की अपील, सभी पक्षों से संयम और बातचीत की मांग पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जताते हुए सभी पक्षों से समझदारी दिखाने और तनाव कम करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदाकी। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध में सबसे ज्यादा कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ती है।