राजकरण

16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में SIR कराने की घोषणा

सूची में हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख शामिल नहीं, करीब 37 करोड़ मतदाताओं का होगा सत्यापन

 भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत करने की घोषणा की। आयोग ने कहा कि यह एक बड़ा देशव्यापी अभियान होगा, जिसका उद्शदे्य मतदाता सूचियों की सटीकता और पारदर्शिता को मजबूत करना है।

आयोग के अनुसार, एसआईआर के तीसरे चरण का कार्यक्रम वर्तमान में जनगणना के तहत चल रहे मकानों की सूचीकरण प्रक्रिया में लगी साझा फील्ड मशीनरी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। तीसरे चरण की शुरुआत के साथ एसआईआर प्रक्रिया पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी, हालांकि इसमें हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख शामिल नहीं होंगे।

आयोग ने कहा कि इन तीन क्षेत्रों का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। यह निर्णय जनगणना के दूसरे चरण के पूरा होने और ऊंचाई वाले तथा बर्फ से ढके क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की है। यह SIR का तीसरा फेज होगा।

पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे। SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है।

केरल में कांग्स रे गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई। बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे इस संशोधन अभियान के तहत 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) गणना चरण में लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।

इन बीएलओ की मदद विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नामित लगभग 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) करेंगे। ईसीआई ने एसआईआर को एक ‘सहभागी और पारदर्शी प्रक्रिया’ बताया है, जिसमें कई स्तरों पर मतदाता, राजनीतिक दल और चुनाव अधिकारी शामिल होते हैं।

राजनीतिक भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे संशोधन प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता, समावेशिता और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए हर मतदान केंद्र पर बूथ स्तर के एजेंट नियुक्त करें। ज्ञानेश कुमार ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तीसरे चरण की शुरुआत के अवसर पर कहा, “मैं सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे एसआईआर के तीसरे चरण में पूरे उत्साह के साथ भाग लें और अपने गणना फॉर्म भरें।

एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाता ही शामिल हों और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम न रहे।” आयोग ने आगे कहा कि 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए एसआईआर अभ्यास के पहले दो चरणों में संबंधित एसआईआर आदेश जारी होने की तारीख तक लगभग 59 करोड़ मतदाता शामिल थे।

इसमें कहा गया है कि इन चरणों के दौरान प्रक्रिया के अलग-अलग स्तरों पर 6.3 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी और 9.2 लाख बूथ लेवल एजेंट को तैनात किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि इस गहन संशोधन अभियान का उद्देश्य डुप्लीकेट, स्थानांतरित, मृत या अयोग्य नामों की पहचान करके मतदाता सूची को सही और त्रुटि-मुक्त बनाना है। साथ ही सभी पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना भी इसका लक्ष्य है। तीसरे फेज में SIR वाले राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोटर हैं। दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव में वोटरों की संख्या सबसे कम है।

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज के तहत, बिहार में सबसे पहले SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ। चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए।