राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
ने नवरात्र के प्रथम दिन अयोध्या स्थित
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित
श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम को
संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर
भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का
पावन प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राम
मंदिर हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक
विरासत से जोड़ता है। राष्ट्रपति द्रौपदी
मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें
यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि
देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु अयोध्या
पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके
हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम अब
धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख वैश्विक
केंद्र बन चुका है और यह मंदिर परिसर
भारत की सनातन चेतना, ऊर्जा और
पुनर्जागरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि
भारत का पुनर्जागरण केवल सांस्कृतिक
ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और
राजनीतिक सभी आयामों में हो रहा है।
राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि प्रभु
श्रीराम का नमन करना और भारत माता
का वंदन करना एक ही भाव है। देवभक्ति
और देशभक्ति का मार्ग अलग नहीं,
बल्कि एक ही है। राष्ट्रपति ने रामराज्य की
अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा
कि यह आर्थिक समृद्धि और सामाजिक
समरसता के सर्वोच्च आदर्शों को प्रस्तुत
करता है।
उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के
रामायण में वर्णित आदर्शों का उल्लेख
करते हुए कहा कि देश उसी दिशा में
आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति ने भगवान
राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों माता शबरी
से भावपूर्णमिलन, निषादराज से स्नेह,
जटायु के प्रति सम्मान, वानर सेना का
सहयोग, जामवंत और यहां तक कि
गिलहरी के योगदान का उल्लेख करते हुए
कहा कि ये सभी उदाहरण एक सर्वस्पर्शी
और सर्वसमावेशी जीवन दर्शन को दर्शाते
हैं।
उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,
जो नवरात्र का प्रथम दिन है, इस पावन
अवसर पर अयोध्या आकर वह स्वयं
को कृतार्थ अनुभव कर रही हैं। साथ
ही उन्होंने देशवासियों को रामनवमी के
अवसर पर अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।
इस मौके पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि
अयोध्या आस्था, संस्कार और विरासत
की भूमि है और आज यह वैश्विक चेतना
का केंद्र बन चुकी है।
राष्ट्रपति ने कहा- अयोध्या में प्रभु
श्रीराम ने जन्म लिया था। इस पवित्र भूमि
पर कदम रखना मेरे लिए सौभाग्य की बात
है। भगवान राम ने अपनी जन्मभूमि को
स्वर्ग से भी बढ़कर बताया था। अयोध्या
नगरी सभी राम भक्तों के लिए भी सबसे
अधिक प्रिय है। उन्होंने कहा- लंका
विजय के बाद भगवान राम का माता सीता
और भाइयों के साथ अयोध्या लौटने का
कलात्मक चित्रण संविधान के पृष्ठों पर
देखने को मिलता है। मुझे इस चित्र को
देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है। उन्होंने
कहा- प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर मैंने
प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा था, जिसमें
कहा था कि राम मंदिर का निर्माण और
इसका साक्षी बनना हम सभी के लिए
सौभाग्य की बात है। हम लोग विकसित
राष्ट्र के निर्माण की दिशा में लगातार आगे
बढ़ रहे हैं। 2040 या उससे पहले हम
अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।