पूर्व भारतीय क्रिकेटर Harbhajan Singh की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। पहले उनकी सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया और राजनीतिक व खेल जगत में इस पर चर्चाएं तेज हो गईं। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा हटाए जाने के बाद संबंधित एजेंसियों ने जोखिम मूल्यांकन (threat assessment) की समीक्षा की। इसके बाद यह पाया गया कि मौजूदा परिस्थितियों और इनपुट्स को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव पर पुनर्विचार जरूरी है।
इसी समीक्षा प्रक्रिया के बाद केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया। इस फैसले के तहत हरभजन सिंह को पहले की तरह सुरक्षा कवर प्रदान किया गया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके। इस घटनाक्रम ने वीआईपी और सार्वजनिक हस्तियों की सुरक्षा नीति को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि सुरक्षा हटाने और फिर उसे बहाल करने जैसे फैसले किन आधारों पर लिए जाते हैं और क्या इसमें और अधिक पारदर्शिता की जरूरत है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नियमित प्रक्रिया के तहत समीक्षा के बाद बदली जाती है और इसमें खुफिया इनपुट, खतरे का स्तर और परिस्थितियों का आकलन शामिल होता है। फिलहाल, सुरक्षा बहाल होने के बाद स्थिति सामान्य बताई जा रही है और संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।